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Report by: Ishu Kumar

Dumka : संताल परगना के दुमका जिले से जमीन माफियाओं के दुस्साहस की एक बड़ी खबर सामने आई है। दुधानी मौजा में सरकारी ‘अनाबादी’ जमीन को फर्जी तरीके से सेटलमेंट दिखाकर लाखों रुपये में बेचने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में संताल परगना टिनेनसी एक्ट (SPT Act) के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। मामला तूल पकड़ने के बाद प्रशासन ने दखल देते हुए फिलहाल जमीन पर चल रहे निर्माण कार्य को रोक दिया है और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।

1932 के खतियान की अनदेखी: नियमों को ताक पर रखकर 9 बीघा का सेटलमेंट

Dumka नियमों के अनुसार, किसी भी मौजा की अनाबादी जमीन का सेटलमेंट केवल उसी मौजा के 1932 के खतियान में दर्ज मूल रैयतों के साथ ही किया जा सकता है। लेकिन दुधानी मौजा में आरोप है कि माफियाओं ने मिलीभगत कर एक ही व्यक्ति के नाम करीब 9 बीघा जमीन का फर्जी सेटलमेंट करा लिया।

अब जमीन दलाल इस बेशकीमती भूखंड को छोटे-छोटे टुकड़ों (कट्ठा) में बांटकर बाहरी लोगों को लाखों रुपये में बेच रहे हैं। स्थानीय मूल रैयतों और ग्रामीणों के कड़े विरोध के बाद यह पूरा मामला दुमका अनुमंडल कार्यालय और एसडीओ के संज्ञान में पहुँचा है।

लाखों की ठगी: कर्ज लेकर जमीन खरीदने वाली महिला खुद को मान रही ठगा

Dumka इस फर्जीवाड़े का शिकार वे लोग हो रहे हैं जिन्होंने अपनी जीवन भर की पूंजी इस उम्मीद में लगा दी कि उन्हें रहने के लिए घर मिलेगा। जमीन खरीदने वाली सरस्वती देवी ने बताया कि उन्होंने गुड्डी बर्मा नामक महिला से साढ़े छह लाख रुपये प्रति कट्ठा की दर से जमीन खरीदी है।

उन्होंने अब तक लगभग 19 लाख रुपये का भुगतान कर दिया है, जिसके लिए उन्हें कर्ज भी लेना पड़ा। सोमवार को जब नगर थाना पुलिस ने मौके पर पहुँचकर निर्माण कार्य रुकवा दिया, तो सरस्वती देवी जैसे खरीदारों के पैरों तले जमीन खिसक गई। वे अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि उनके द्वारा निवेश किया गया पैसा डूब सकता है।

‘सरकारी खास’ जमीन पर माफिया का कब्जा: ग्रामीणों ने उठाई आवाज

Dumka दुधानी के ग्राम प्रधान नेपाल राउत और स्थानीय निवासी किशोर यादव ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि प्लॉट नंबर 29 की यह जमीन ‘अनाबादी जमाबंदी’ यानी सरकारी जमीन है। इस क्षेत्र में पहले से ही पंचायत भवन, खादी ग्रामोद्योग और खादी पार्क जैसे सरकारी संस्थान मौजूद हैं।

आरोप है कि रविंद्रनाथ बर्मा, बबलू बर्मा और दीपू बर्मा नामक तीन भाई, जो इस मौजा के रैयत भी नहीं हैं, इस जमीन की अवैध खरीद-बिक्री में संलिप्त हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि:

  • सरकारी जमीन को भू-माफियाओं के अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए।
  • इस जमीन पर अस्पताल, स्कूल या अन्य सार्वजनिक संस्थानों का निर्माण हो।
  • फर्जी कागजात तैयार करने वाले गिरोह पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

फिलहाल, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जमीन से संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस बड़े भू-घोटाले में शामिल चेहरों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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