Iran-America tensionIran-America tension
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Iran-America tension : मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत या युद्धविराम की पहल की खबरों का कड़ा खंडन किया है। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय साक्षात्कार के दौरान, अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान की ओर से न तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क किया गया है और न ही युद्ध को रोकने के लिए कोई गिड़गिड़ाहट की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान की सैन्य नीतियां केवल रक्षात्मक हैं और वे तब तक जारी रहेंगी जब तक देश की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।

बातचीत की संभावनाओं को सिरे से खारिज किया

Iran-America tension अब्बास अराघची ने अमेरिकी दावों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका के साथ किसी भी संवाद का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने सीबीएस न्यूज को दिए बयान में तर्क दिया कि जब ईरान कूटनीतिक रास्तों पर चल रहा था, तब अमेरिका ने हमलावर रुख अपनाया।

विदेश मंत्री के अनुसार, ईरान ने कभी भी स्वेच्छा से युद्धविराम की मांग नहीं की है। उन्होंने कहा, “हमें अमेरिकियों से बात करने की कोई आवश्यकता महसूस नहीं होती। जब हम बातचीत की मेज पर थे, तब उन्होंने हम पर हमला किया। अब हमारी कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक अमेरिका अपनी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को पूरी तरह बंद नहीं कर देता।” यह बयान उन रिपोर्टों को पूरी तरह से खारिज करता है जिनमें दावा किया गया था कि ईरान आर्थिक प्रतिबंधों के दबाव में आकर ट्रंप प्रशासन से समझौता करना चाहता है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का रुख

Iran-America tension ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि उसका लक्ष्य केवल अमेरिकी सैन्य ठिकाने रहे हैं। अराघची ने विश्वास दिलाया कि ईरान की मंशा खाड़ी देशों या अपने पड़ोसियों को नुकसान पहुँचाने की नहीं है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि कई खाड़ी देशों ने अपने क्षेत्र में अमेरिकी सेना को तैनात होने की अनुमति दी है, जिससे पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता खतरे में पड़ गई है।

ईरान का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति ही तनाव की असली जड़ है। अराघची ने संकेत दिया कि जब तक बाहरी ताकतों का हस्तक्षेप रहेगा, तब तक क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बना रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

सहयोगी देशों को कड़ी चेतावनी और भविष्य की शर्तें

Iran-America tension ईरानी विदेश मंत्री ने उन देशों को भी आगाह किया है जो अमेरिका या इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह संघर्ष तभी समाप्त होगा जब ईरान को ठोस गारंटी मिलेगी कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।

ईरान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के नुकसान का हर्जाना देने के पक्ष में नहीं है, बल्कि वह अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्वायत्तता पर अडिग है। अराघची के इस कड़े रुख से यह साफ है कि आने वाले समय में ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक सुलह की संभावना बेहद कम है और तेहरान अपनी “प्रतिरोध की नीति” को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाएगा।

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