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Report by: Avinash Srivastwa

Rohtas : रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने रेल संपत्ति की चोरी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। लगभग दो महीने पहले कर्मनाशा स्टेशन से सीमेंट स्लीपर बदलने वाली मशीन (TRM रेक) से चोरी हुए ‘टीआरटी ब्रिज’ को आरपीएफ ने बरामद कर लिया है। बरामद किए गए इस लोहे के ब्रिज की कीमत बाजार में 3 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। इस मामले में पुलिस ने जाल बिछाकर तीन शातिर चोरों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

गुप्त सूचना पर आरपीएफ और सीआईबी का संयुक्त ऑपरेशन

Rohtas इस चोरी की घटना को लेकर सासाराम आरपीएफ पोस्ट में रेल संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम की धारा 3 के तहत अज्ञात अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। लंबे समय से पुलिस इन चोरों की तलाश में जुटी थी। इसी बीच निरीक्षक संजीव कुमार और सीआईबी डीडीयू के निरीक्षक अर्जुन यादव को गुप्त सूचना मिली कि कर्मनाशा स्टेशन के उत्तर दिशा में स्थित नरमा गांव के कुछ अपराधी चोरी का माल ठिकाने लगाने की फिराक में हैं।

सूचना को पुख्ता मानकर आरपीएफ और सीआईबी की एक संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने रात के अंधेरे में नरमा गांव के पास तालाब और मुख्य सड़क के इर्द-गिर्द एम्बुश (घेराबंदी) लगाया और आरोपियों के आने का इंतजार करने लगे।

आधी रात को तालाब से निकाला जा रहा था ‘माल’, पुलिस ने घेराबंदी कर दबोचा

Rohtas रात के करीब 12:30 बजे सन्नाटे का फायदा उठाकर तीन संदिग्ध व्यक्ति तालाब के पास पहुंचे और पानी के भीतर छुपाया गया भारी भरकम लोहे का सामान बाहर निकालने लगे। जैसे ही पुलिस टीम ने उन्हें रुकने की चेतावनी दी, आरोपी सामान छोड़कर भागने लगे। हालांकि, पहले से मुस्तैद जवानों ने घेराबंदी कर तीनों को दौड़ाकर पकड़ लिया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:

  • शशिकांत कुमार उर्फ खब्बी (26 वर्ष): निवासी नरमा, जिला कैमूर।
  • छोटू पासवान (30 वर्ष): निवासी नरमा, जिला कैमूर।
  • उज्जवल कुमार (19 वर्ष): निवासी घटाव, थाना कुदरा, जिला कैमूर।

मकर संक्रांति से पहले हुई थी चोरी, पुलिस के डर से तालाब में छुपाया था ब्रिज

Rohtas पूछताछ के दौरान पकड़े गए आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति से ठीक पहले उन्होंने कर्मनाशा स्टेशन की लूप लाइन में खड़ी टीआरएम रेक से इस भारी-भरकम टीआरटी ब्रिज को खोलकर चोरी किया था। गिरफ्तारी के डर से उन्होंने इस चोरी के सामान को पास के ही एक तालाब में पानी के अंदर छुपा दिया था।

आरोपियों ने कबूल किया कि आरपीएफ की लगातार छापेमारी और बढ़ती सक्रियता के कारण वे पिछले दो महीनों से इस सामान को निकालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। फिलहाल, आरपीएफ ने चोरी की गई रेल संपत्ति को जब्त कर लिया है और तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

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