Report by: Mohd Athar Khan
Munger : बिहार के मुंगेर जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। यहाँ के जमालपुर प्रखंड स्थित हालिमपुर गौरीपुर स्वास्थ्य उपकेंद्र (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) की महिला कर्मियों ने ग्रामीणों को ऐसी दवाइयां वितरित कर दीं, जिनकी उपयोग की समय-सीमा (Expairy Date) काफी समय पहले ही समाप्त हो चुकी थी। इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि क्षेत्र के लोगों के जीवन को भी खतरे में डाल दिया है।
स्वास्थ्य कर्मियों की घोर लापरवाही और ग्रामीणों का आक्रोश
Munger हालिमपुर गौरीपुर स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में कार्यरत तीन महिला कर्मियों—सीएचओ (CHO) रिबिका कुमारी, एएनएम (ANM) निहारिका कुमारी और जीएनएम (GNM) प्रीति कुमारी पर आरोप है कि उन्होंने घर-घर जाकर सरकारी योजनाओं के नाम पर ग्रामीणों के बीच दवाइयां बांटीं। वितरित की गई दवाओं की सूची में बुखार, बदन दर्द और संक्रमण की गोलियां शामिल थीं।

हैरानी की बात तब सामने आई जब कुछ जागरूक ग्रामीणों ने दवा के पैकेटों पर छपी तारीखों की जांच की। जांच में पाया गया कि कई दवाओं की वैधता 6 से 12 महीने पहले ही खत्म हो चुकी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य कर्मी बिना किसी जिम्मेदारी के एक्सपायर्ड दवाएं बांट रहे थे, जिससे किसी की जान भी जा सकती थी। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि यह पहली बार नहीं है; इससे पूर्व भी इस केंद्र द्वारा ऐसी ही लापरवाही बरती गई है।
जीवन के साथ खिलवाड़: मासूम ग्रामीणों का भरोसा टूटा
Munger ग्रामीणों, विशेषकर गांव की महिलाओं का कहना है कि उन्होंने सरकारी अस्पताल की टीम पर भरोसा करके दवाइयां ली थीं। उन्हें लगा कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से मिल रही दवाएं सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण होंगी। लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों ने बिना किसी जानकारी या चेतावनी के एक्सपायर हो चुकी दवाओं का वितरण कर दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सीधे तौर पर उनके मौलिक अधिकारों और जीवन के साथ खिलवाड़ है। अगर कोई बच्चा या बुजुर्ग इन दवाओं का सेवन कर लेता, तो इसका परिणाम घातक हो सकता था। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में स्वास्थ्य विभाग के प्रति गहरा असंतोष और डर का माहौल व्याप्त है।
विभाग की सफाई और जांच के आदेश
Munger मामला मीडिया में आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। जहाँ शुरुआती स्तर पर कुछ अधिकारियों द्वारा मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की खबरें आईं, वहीं अब उच्चाधिकारियों ने सख्त रुख अपनाया है।
प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. रमन कुमार ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि मीडिया के माध्यम से उन्हें इस गंभीर लापरवाही की जानकारी मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की चूक किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की गहराई से पड़ताल के लिए एक विशेष जांच टीम का गठन कर दिया गया है। डॉ. कुमार ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होते ही संबंधित महिला कर्मियों और इस लापरवाही के पीछे जिम्मेदार अन्य अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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