By: Yogendra Singh
Madhya Pradesh : मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने विजयपुर विधानसभा सीट से निर्वाचित कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य (रद्द) घोषित कर दिया है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए भाजपा प्रत्याशी और तत्कालीन प्रतिद्वंदी रामनिवास रावत को विजयी घोषित किया है।
अदालत ने पाया कि मुकेश मल्होत्रा ने अपने चुनावी हलफनामे में आपराधिक जानकारी छिपाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ किया था। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने इस फैसले के क्रियान्वयन पर 15 दिनों की रोक लगाई है, ताकि प्रभावित पक्ष ऊपरी अदालत में अपील कर सके।
हलफनामे में जानकारी छिपाना पड़ा भारी: कोर्ट की सख्त टिप्पणी
Madhya Pradesh अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मुकेश मल्होत्रा ने जानबूझकर मतदाताओं से अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि छिपाई। मल्होत्रा ने बचाव में तर्क दिया था कि हलफनामे में जानकारी का छूटना एक ‘सद्भावना भूल’ थी और इसके लिए उन्होंने फॉर्म भरने वाले व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराया।
लेकिन, हाईकोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि मल्होत्रा एमए और एलएलबी (वकील) जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति हैं, ऐसे में यह कहना कि उन्हें कानूनी बारीकियों और आरोपों की गंभीरता का पता नहीं था, गले नहीं उतरता। बिना पढ़े हलफनामे पर हस्ताक्षर करने की दलील को कोर्ट ने अविश्वसनीय माना।
पेड़ों की कटाई और आदिवासी आस्था का मुद्दा
Madhya Pradesh कोर्ट ने फैसले के पीछे एक बेहद महत्वपूर्ण नैतिक और कानूनी आधार रखा। विजयपुर एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहाँ प्रकृति और वृक्षों की पूजा की जाती है। मुकेश मल्होत्रा पर 210 पेड़ों को अवैध रूप से काटने के मामले में सजा हुई थी, जिसे उन्होंने हलफनामे में नहीं दर्शाया।
न्यायालय ने माना कि पेड़ों की कटाई से जुड़ा आपराधिक रिकॉर्ड छिपाना कोई मामूली गलती नहीं है। यह स्थानीय मतदाताओं की भावनाओं और उनके निर्णय लेने की क्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला ‘भ्रष्ट आचरण’ है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत इसे मतदाताओं पर अनुचित प्रभाव डालना माना गया।
उपचुनाव के आंकड़े और रामनिवास रावत की जीत
Madhya Pradesh नवंबर 2024 में हुए विजयपुर उपचुनाव में मुकेश मल्होत्रा ने रामनिवास रावत को 7,364 वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी। उस समय मल्होत्रा को 50.66% और रावत को 46.95% मत मिले थे। रामनिवास रावत, जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे, ने इस निर्वाचन को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने अब रावत की याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें निर्वाचित घोषित कर दिया है। कोर्ट का मानना है कि यदि मतदाताओं को उम्मीदवार की पूरी आपराधिक पृष्ठभूमि का पता होता, तो चुनाव परिणाम भिन्न हो सकते थे।
यह फैसला राजनीति में शुचिता और उम्मीदवारों की पारदर्शिता को लेकर एक नजीर पेश करता है। अब देखना होगा कि मुकेश मल्होत्रा इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं या नहीं।
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