By: Ishu Kumar
Jhunjhunu : राजस्थान का झुंझुनूं जिला अब केवल वीरों की भूमि ही नहीं, बल्कि मेधावी प्रतिभाओं का केंद्र भी बनता जा रहा है। यहाँ की रहने वाली राजकुमारी पारीक ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की परीक्षा पास कर एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। राजकुमारी ने मात्र 19 वर्ष 126 दिन की आयु में यह सफलता हासिल की है, जिसके साथ ही वह भारत की सबसे कम उम्र की महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट बन गई हैं। उनकी इस कामयाबी ने पूरे शेखावाटी क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
नंदिनी अग्रवाल का रिकॉर्ड ध्वस्त: अब राजकुमारी के नाम राष्ट्रीय गौरव
Jhunjhunu राजकुमारी की इस उपलब्धि ने मध्य प्रदेश के मुरैना की नंदिनी अग्रवाल के नाम दर्ज पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
- नंदिनी अग्रवाल: इन्होंने 19 साल 330 दिन की उम्र में सीए बनकर यह खिताब हासिल किया था।
- राजकुमारी पारीक: इन्होंने इस रिकॉर्ड को काफी बड़े अंतर से तोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
जैसे ही आधिकारिक परिणाम घोषित हुए, झुंझुनूं स्थित उनके निवास पर जश्न का माहौल बन गया और पूरे देश से उन्हें बधाई संदेश मिलने लगे।
छोटे शहर से बुलंदियों तक: संसाधनों पर भारी पड़ा संकल्प
Jhunjhunu अक्सर माना जाता है कि सीए जैसी कठिन परीक्षा के लिए बड़े महानगरों और महंगे कोचिंग संस्थानों की जरूरत होती है, लेकिन राजकुमारी ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया। उनकी सफलता का सफर पूरी तरह जमीनी स्तर पर आधारित रहा:
- शिक्षा और तैयारी: उनकी स्कूली शिक्षा झुंझुनूं के स्थानीय स्कूल से हुई। उन्होंने सीए इंटरमीडिएट की तैयारी भी स्वाध्याय (Self-study) और स्थानीय मार्गदर्शन से पूरी की।
- प्रैक्टिकल ट्रेनिंग: उन्होंने अपनी आर्टिकलशिप (व्यावहारिक प्रशिक्षण) झुंझुनूं की ही एक प्रतिष्ठित फर्म ‘G N A & Co.’ से पूरी की।
- पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता हेमंत कुमार पारीक अरुणाचल प्रदेश में व्यवसाय करते हैं और माता सावित्री देवी एक कुशल गृहणी हैं। उनके परिवार के अटूट सहयोग ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया।
कठिन परिश्रम और देश की बेटियों के लिए प्रेरणा
Jhunjhunu इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) की परीक्षा को दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पहली बार में और इतनी कम उम्र में पास करना राजकुमारी के असाधारण अनुशासन और कठिन परिश्रम को दर्शाता है।
“राजकुमारी की यह जीत उन सभी छात्राओं के लिए एक संदेश है जो छोटे शहरों में रहकर बड़े सपने देखती हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची, तो उम्र का आंकड़ा कभी बाधा नहीं बनता।”
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