By: Yogendra Singh
Chhapra : सारण जिले के मांझी प्रखंड के चकिया गांव से एक दुखद खबर सामने आई है। 35 वर्षीय प्रकाश यादव, जो राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) में कमांडो के पद पर तैनात थे, जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी के दौरान असमय काल के गाल में समा गए। उनके निधन की खबर मिलते ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई।
ड्यूटी के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत
Chhapra जानकारी के अनुसार, प्रकाश यादव अपनी नियमित ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई और वे बेहोश होकर गिर पड़े। साथियों ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन इलाज के क्रम में उनका निधन हो गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने की वजह से यह दुखद घटना हुई।
गांव में मातम, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
Chhapra जैसे ही उनके निधन की सूचना चकिया गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक छा गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। घर पर शोक संतप्त माहौल है और ग्रामीण लगातार परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं। गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने बताया कि प्रकाश यादव बचपन से ही देश सेवा का जज्बा रखते थे। उनकी सादगी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के कारण वे सभी के प्रिय थे।
साहस और देशभक्ति की मिसाल
Chhapra प्रकाश यादव का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत था। एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने कठिन प्रशिक्षण प्राप्त कर एनएसजी कमांडो के रूप में देश की सेवा की। ग्रामीणों ने उन्हें बहादुर और जिम्मेदार जवान बताया, जिन्होंने अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखा। उनका असमय निधन न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे सारण जिले के लिए अपूरणीय क्षति है।
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि शहीद जवान के परिवार को हर संभव सहायता प्रदान की जाए। गांव में लोग उनके अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रकाश यादव की यादें और उनका साहसिक जीवन गांववासियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेगा। उनका बलिदान और कर्तव्यनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
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