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Bhopal : आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) को लेकर यह आम धारणा बना दी गई है कि उन्हें सरकारी नौकरियों और भर्तियों में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। लेकिन हकीकत इससे अलग है। मंत्रालयीन सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक का कहना है कि गरीब सामान्य वर्ग को व्यवहार में अधिकतम 5 प्रतिशत तक ही आरक्षण का लाभ मिल पाता है। उन्होंने इसे लेकर शासन की आरक्षण व्यवस्था और गणना पद्धति पर सवाल खड़े किए हैं।

‘यूआर’ की जगह ‘मेरिट श्रेणी’ बनाने की मांग

Bhopal इंजीनियर सुधीर नायक ने अपने बयान में कहा कि वर्तमान व्यवस्था में अनारक्षित (यूआर) श्रेणी को ही सामान्य वर्ग मान लिया गया है, जबकि वास्तव में सामान्य वर्ग को अलग से कोई अतिरिक्त लाभ नहीं दिया गया। उनका तर्क है कि एक तरफ अनारक्षित वर्ग की सीटें घटाई जाती हैं और दूसरी तरफ उसी घटे हुए हिस्से में से ईडब्ल्यूएस को आरक्षण दिखा दिया जाता है। इसी वजह से उन्होंने शासन से मांग की है कि यूआर श्रेणी के स्थान पर ‘मेरिट श्रेणी’ बनाई जाए, ताकि शीर्ष प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों को वास्तविक अवसर मिल सके।

10 प्रतिशत नहीं, सिर्फ अनारक्षित सीटों का हिस्सा

Bhopal संघ अध्यक्ष के अनुसार, ईडब्ल्यूएस के लिए घोषित 10 प्रतिशत आरक्षण कुल पदों का नहीं बल्कि केवल अनारक्षित पदों का 10 प्रतिशत होता है। कई न्यायिक फैसलों में भी यह बात स्पष्ट हो चुकी है। उदाहरण के तौर पर यदि 100 पदों पर भर्ती होती है, तो पहले एसटी, एससी और ओबीसी के लिए आरक्षित पद अलग कर दिए जाते हैं। इसके बाद जो पद अनारक्षित बचते हैं, उन्हीं का 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस को दिया जाता है। इस गणना के बाद ईडब्ल्यूएस का वास्तविक हिस्सा कुल पदों का लगभग 5 प्रतिशत ही रह जाता है।

Bhopal आगे और घट सकता है ईडब्ल्यूएस का हिस्सा

उन्होंने आशंका जताई कि यदि भविष्य में आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से ऊपर बढ़ाई जाती है, तो गरीब सामान्य वर्ग का ईडब्ल्यूएस आरक्षण और कम हो सकता है। ऐसे में यह हिस्सा घटकर लगभग 3.7 प्रतिशत तक सिमट सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हर श्रेणी में 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षण है, 6 प्रतिशत दिव्यांगों के लिए आरक्षित हैं, वहीं संविदा कर्मियों और भूतपूर्व सैनिकों के लिए भी अलग प्रावधान हैं। इन सबके बीच केवल मेरिट के आधार पर चयन के लिए कोई अलग श्रेणी नहीं बनाई गई है।

मध्यप्रदेश की मौजूदा स्थिति

Bhopal मध्यप्रदेश में यदि 100 पदों पर भर्ती निकलती है, तो लगभग 20 प्रतिशत एसटी, 16 प्रतिशत एससी और 14 प्रतिशत ओबीसी के लिए आरक्षित होते हैं। इसके बाद 50 पद अनारक्षित बचते हैं। इन्हीं 50 पदों में से 10 प्रतिशत यानी 5 पद ईडब्ल्यूएस को मिलते हैं, जो कुल पदों का सिर्फ 5 प्रतिशत होते हैं। ऐसे में ईडब्ल्यूएस को मिलने वाला आरक्षण कभी भी कुल रिक्तियों के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता।

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