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BY: Yoganand Shrivastva

मध्य प्रदेश की मोहन सरकार की असल तस्वीर अब खुद उसके मुख्य सचिव अनुराग जैन के बयान से सामने आ गई है। जब राज्य का सबसे बड़ा अफसर यह कहे कि मुख्यमंत्री मानते हैं कि बिना पैसे दिए काम नहीं होता, तो यह केवल बयान नहीं बल्कि पूरी सरकार की विफलता का सार्वजनिक कबूलनामा है। विपक्ष ने इसे “भ्रष्टाचार की आधिकारिक स्वीकारोक्ति” करार दिया है।

भ्रष्टाचार सरकार की पहचान बन चुका है
भ्रष्टाचार पर नाराजगी जताकर सरकार अब अधिकारियों पर ठीकरा फोड़ना चाहती है, जबकि सच्चाई यह है कि यह भ्रष्ट सिस्टम सरकार की सरपरस्ती में ही पनपा है। विपक्षी दलों ने कहा है कि अगर सरकार ईमानदार होती तो मुख्य सचिव को ऐसी फटकार लगाने की नौबत ही नहीं आती।

मुख्यमंत्री के नाम से उठे सवाल, जनता का भरोसा टूटा
मुख्य सचिव द्वारा मुख्यमंत्री का हवाला देना बेहद गंभीर मामला है। विपक्ष का आरोप है कि जब खुद मुख्यमंत्री यह मान लें कि बिना घूस के काम नहीं होता, तो यह सरकार के हर “सुशासन” के दावे को झूठा साबित करता है। जनता के बीच यह संदेश गया है कि मध्य प्रदेश में सरकार नहीं, बल्कि पैसा चलता है।

जनता से कटे अफसर, जिम्मेदार सरकार
कलेक्टरों को फील्ड में जाने और जनता से मिलने की नसीहत यह बताती है कि प्रशासन पूरी तरह जनता से कट चुका है। विपक्ष ने सवाल उठाया है कि क्या अफसर अपने मन से जनता से दूर हुए या सरकार ने उन्हें फाइलों और आदेशों में उलझाकर रख दिया।

राजस्व व्यवस्था ध्वस्त, सरकार मौन
आरसीएमएस में देरी और राजस्व मामलों की बदहाली कोई नई बात नहीं है। यह वर्षों से जारी अव्यवस्था है, लेकिन सरकार ने कभी सुधार की गंभीर कोशिश नहीं की। विपक्ष का कहना है कि चेतावनी देना आसान है, लेकिन सिस्टम सुधारने की इच्छाशक्ति सरकार में नहीं है।

अवैध खनन: सरकार की मिलीभगत के आरोप
अवैध खनिज कारोबार पर सख्ती के निर्देश यह साबित करते हैं कि यह धंधा लंबे समय से सरकार की आंखों के सामने चल रहा था। विपक्ष ने सीधा आरोप लगाया है कि बिना राजनीतिक संरक्षण के इतना बड़ा अवैध कारोबार संभव ही नहीं है।

प्रशासन में हलचल नहीं, सरकार के अंत की आहट
मुख्य सचिव के तेवरों से प्रशासनिक हलचल जरूर मची है, लेकिन असल में यह सरकार के लिए खतरे की घंटी है। विपक्ष का दावा है कि यह बयान आने वाले समय में सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा और जनता को सच्चाई का एहसास कराएगा।

विपक्ष का सीधा हमला
विपक्षी नेताओं ने कहा है कि “यह सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नहीं, बल्कि जीरो जवाबदेही की सरकार है। अब सवाल अफसरों का नहीं, सत्ता में बैठे लोगों का है।”

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