By: Ravindra Sikarwar
इंदौर से महज 35 किलोमीटर दूर उमरीखेड़ा का घना जंगल अब दिन के साथ-साथ रात में भी सैलानियों को अपनी गोद में बुला रहा है। मध्य प्रदेश वन विभाग और इंदौर जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयोजन से संचालित उमरीखेड़ा एडवेंचर एंड इको टूरिज्म पार्क ने पहली बार “नाइट सफारी” और “जंगल स्टे” की सुविधा शुरू की है। सबसे बड़ी बात यह है कि एक व्यक्ति के लिए पूरी पैकेज की कीमत सिर्फ 350 रुपए रखी गई है, जिसमें पार्क एंट्री, शाम की नाइट सफारी, रात का खाना, सुबह का नाश्ता और वाहन पार्किंग सब कुछ शामिल है। परिवारों के लिए अलग से स्पेशल डिस्काउंट पैकेज भी लॉन्च किए गए हैं, जिनमें चार लोगों का पैकेज मात्र 1200 से 1400 रुपए तक उपलब्ध है।
पहले इस पार्क में सिर्फ सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक ही विजिटर्स आ सकते थे, लेकिन अब आप शाम 4 बजे से अगले दिन सुबह 10 बजे तक पूरा 18 घंटे जंगल के बीच बिता सकेंगे। पार्क प्रबंधन ने इसके लिए 20 लग्जरी टेंट, 10 कुटीर और 5 ट्री हट्स तैयार किए हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित और आरामदायक हैं। हर टेंट में अटैच्ड वॉशरूम, चार्जिंग पॉइंट, कूलर और सोलर लाइट की व्यवस्था है। रात में जंगल की सन्नाटे भरी आवाजें, तेंदुए-भालू की दहाड़, सियारों की टोलियाँ और ऊपर चमकता तारों भरा आकाश; यह अनुभव शहर की चकाचौंध से बिल्कुल अलग दुनिया का एहसास कराता है। नाइट सफारी के दौरान वन विभाग के प्रशिक्षित गाइड और सशस्त्र गार्ड साथ रहते हैं, इसलिए सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं है। सफारी में जिप्सी से जंगल के कोर एरिया में घूमा जाता है, जहाँ अक्सर तेंदुआ, भालू, नीलगाय, सांभर और जंगली सूअर नजर आ जाते हैं।
शाम 6 बजे से शुरू होने वाली नाइट सफारी के बाद कैंप फायर के साथ मध्य प्रदेशी स्वाद का डिनर परोसा जाता है। मेन्यू में दाल-बाफली, भुट्टे की कढ़ी, मक्के की रोटी, बाजरे का खिचड़ा, देसी चिकन और पनीर की सब्जियाँ शामिल रहती हैं। सुबह चाय के साथ पोहा-जलेबी या उपमा जैसे नाश्ते के बाद बर्ड वॉचिंग और छोटी ट्रेकिंग भी कराई जाती है। पार्क में पहले से मौजूद जिप लाइन, रॉक क्लाइम्बिंग, बर्मा ब्रिज, कमांडो नेट, आर्चरी, राइफल शूटिंग जैसी 25 से ज्यादा एक्टिविटी भी रात भर उपलब्ध रहती हैं। बच्चों के लिए अलग से किड्स जोन और ट्रैम्पोलीन भी है। दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर फ्रेंडली रास्ते और रैंप बनाए गए हैं।
वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि यह प्रयोग इसलिए किया गया है ताकि लोग जंगल और वन्यजीवों से जुड़ाव महसूस करें और संरक्षण के प्रति जागरूक हों। अभी शुरुआती दौर में रोजाना सिर्फ 80-100 लोगों को ही परमिशन दी जा रही है, ताकि जंगल पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। बुकिंग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से हो रही है, लेकिन वीकेंड पर पहले से ही सारे स्लॉट बुक हो चुके हैं। अगर आप भी शहर की भागदौड़ से दूर, जंगल की ठंडी हवा में एक रात बिताना चाहते हैं, तो यह मौका शायद इंदौर वालों के लिए सबसे सस्ता और यादगार विकल्प साबित होने वाला है। प्रकृति के इतने करीब और सिर्फ 350 रुपए में; इससे बेहतर डील फिलहाल कहीं और मिलना मुश्किल है।
