by-Ravindra Sikarwar
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात पहुंचेंगे, जहां वे राज्य के महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण गतिविधियों में भाग लेंगे। इस दौरे का मुख्य आकर्षण मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (एमएएचएसआर) होगा, जिसकी समीक्षा सूरत में निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन स्टेशन पर की जाएगी। यह दौरा न केवल परियोजना की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगा, बल्कि भारत को हाई-स्पीड रेल यात्रा के युग में प्रवेश कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
दौरे का कार्यक्रम:
प्रधानमंत्री मोदी सुबह करीब 10 बजे सूरत के अंतरोली गांव में स्थित निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन स्टेशन का दौरा करेंगे। यहां वे स्टेशन के कार्यान्वयन की प्रगति का जायजा लेंगे, जिसमें साइट निरीक्षण, तकनीकी चर्चा और संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक शामिल होगी। यह स्टेशन सूरत-बारडोली रोड के पास स्थित है और शहर की उत्कृष्ट कनेक्टिविटी का लाभ उठाता है। अंतरोली स्टेशन का डिजाइन सूरत के विश्व प्रसिद्ध हीरा उद्योग से प्रेरित है, जो सुंदरता और कार्यक्षमता का अनूठा संगम दर्शाता है। स्टेशन में यात्री सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया है, जैसे विस्तृत वेटिंग लाउंज, स्वच्छता सुविधाएं, रिटेल आउटलेट्स और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी। यह स्टेशन आगामी सूरत मेट्रो, सिटी बसों तथा भारतीय रेलवे नेटवर्क से सीधे जुड़ेगा, जिससे यात्रियों को सहज और तेज परिवहन विकल्प मिलेंगे।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री नर्मदा जिले के आदिवासी क्षेत्र में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इसमें गुजरात के 14 आदिवासी जिलों के लिए 250 नई बसों को हरी झंडी दिखाना, 42 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) का उद्घाटन (लगभग 1,900 करोड़ रुपये की लागत से), 228 बहुउद्देशीय केंद्रों की शुरुआत, असम मेडिकल कॉलेज के सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस तथा इम्फाल में ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट भवन का लोकार्पण शामिल है। ये पहल आदिवासी समुदायों के शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर केंद्रित हैं।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का अवलोकन:
यह 508 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर भारत का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट है, जो गुजरात (352 किमी), महाराष्ट्र (156 किमी) तथा दादरा और नगर हवेली केंद्र शासित प्रदेश से होकर गुजरेगा। यह प्रमुख शहरों जैसे साबरमती, अहमदाबाद, आनंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोइसार, वीरार, ठाणे और मुंबई को जोड़ेगा। परियोजना का कुल अनुमानित खर्च 1,08,000 करोड़ रुपये है, जिसमें जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जाइका) 81% (लगभग 88,000 करोड़ रुपये) का ऋण दे रही है। शेष 19% (20,000 करोड़ रुपये) का बोझ रेल मंत्रालय (50%), महाराष्ट्र सरकार (25%) तथा गुजरात सरकार (25%) वहन करेंगी। जून 2025 तक कुल व्यय 30,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
एक बार चालू होने पर यह कॉरिडोर यात्रा के समय में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। मुंबई से सूरत की दूरी वर्तमान 4-5 घंटों से घटकर मात्र 1 घंटे 20 मिनट (80 मिनट) रह जाएगी, जबकि मुंबई-अहमदाबाद की यात्रा 7-8 घंटों के बजाय सिर्फ 2 घंटे 7 मिनट (127 मिनट) में पूरी हो सकेगी। यह न केवल आर्थिक विकास को गति देगा, बल्कि पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा भी मिलेगा।
प्रगति की स्थिति:
परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। सूरत-बिलिमोरा खंड (47 किमी) सबसे उन्नत चरण में है, जहां सिविल वर्क्स और ट्रैक-बेड लेइंग पूरा हो चुका है। इस खंड को 2027 की पहली तिमाही में संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है। 2028 तक ठाणे-अहमदाबाद खंड और 2029 तक पूरा कॉरिडोर चालू होने का लक्ष्य है। हाल ही में वेस्टर्न रेलवे के महाप्रबंधक सहित वरिष्ठ रेल अधिकारियों ने अंतरोली स्टेशन का निरीक्षण किया है, जबकि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी जल्द दौरा करेंगे।
सूरत रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास भी इसी परियोजना का हिस्सा है, जिसमें यात्री सुविधाओं का विस्तार, कॉनकोर्स-आधारित सर्कुलेशन और बेहतर कनेक्टिविटी पर काम चल रहा है।
महत्व और प्रभाव:
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वाकांक्षा ‘विकसित भारत’ को साकार करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। गुजरात से जुड़े होने के कारण यह परियोजना पीएम के गृहराज्य के लिए विशेष महत्व रखती है। यह न केवल राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करेगा, बल्कि रोजगार सृजन, पर्यटन और व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बुलेट ट्रेन नेटवर्क भारत को वैश्विक हाई-स्पीड रेल मानचित्र पर स्थापित करेगा।
दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रहेगी, और स्थानीय प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह यात्रा गुजरात की सांस्कृतिक और विकासात्मक छवि को और मजबूत करेगी।

