by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी और उनकी पूर्व पत्नी हसीन जहां के बीच लंबे समय से चला आ रहा पारिवारिक विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के द्वार पर पहुंच गया है। हसीन जहां ने अदालत में एक विशेष याचिका प्रस्तुत कर शमी से मिलने वाले मासिक गुजारा भत्ते को चार लाख रुपये से बढ़ाकर दस लाख रुपये करने की गुहार लगाई है। इस मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शमी और पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान यह भी सवाल उठाया कि क्या वर्तमान राशि इतनी कम है कि इसे दोगुना से भी अधिक बढ़ाने की जरूरत पड़े।
मामले की पृष्ठभूमि और कोर्ट के पिछले फैसले:
शमी और हसीन जहां का वैवाहिक जीवन 2018 से ही विवादों में घिरा हुआ है। हसीन जहां ने शमी पर घरेलू हिंसा, दहेज की मांग और अन्य पारिवारिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद दोनों के बीच कानूनी जंग शुरू हो गई। इस दौरान गुजारा भत्ते का मुद्दा भी प्रमुखता से उभरा। कोलकाता के अलीपुर कोर्ट ने शुरू में गुजारा भत्ता तय किया था, लेकिन हसीन जहां ने इसे अपर्याप्त बताते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में अपील की।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में शमी को हसीन जहां और उनकी बेटी के भरण-पोषण के लिए कुल चार लाख रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया था। इसमें से 1.5 लाख रुपये हसीन जहां के लिए और शेष 2.5 लाख रुपये उनकी बेटी की देखभाल, शिक्षा और अन्य जरूरतों के लिए निर्धारित किए गए थे। यह फैसला हसीन जहां को कुछ राहत प्रदान करने वाला था, लेकिन उन्होंने इसे अपनी और बेटी की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप न मानते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
हसीन जहां की दलीलें: शमी की कमाई और जीवनशैली पर जोर
याचिका में हसीन जहां के वकील ने शमी की वित्तीय स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनका कहना है कि शमी की मासिक आय करोड़ों में है, जो 2021 के आयकर रिटर्न (आईटीआर) से स्पष्ट है। इन दस्तावेजों के अनुसार, शमी की प्रति माह कमाई लगभग 60 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा, शमी के पास सैकड़ों करोड़ रुपये की अचल संपत्ति, महंगी लग्जरी कारें, लगातार विदेश यात्राएं और उच्चस्तरीय जीवनशैली के प्रमाण मौजूद हैं।
हसीन जहां का तर्क है कि चार लाख रुपये की राशि मुद्रास्फीति, बेटी की बढ़ती उम्र और शिक्षा के खर्चों को ध्यान में रखते हुए बिल्कुल नाकाफी साबित हो रही है। उन्होंने अदालत से अपील की है कि शमी की कमाई के अनुपात में गुजारा भत्ता को उचित स्तर पर पहुंचाया जाए, ताकि वे और उनकी बेटी सम्मानजनक जीवन जी सकें। याचिका में यह भी कहा गया है कि शमी की क्रिकेट करियर से होने वाली आय, विज्ञापन सौदे और अन्य स्रोतों से प्राप्त धनराशि को गुजारा भत्ते के निर्धारण में आधार बनाया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया और नोटिस:
सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने सुनवाई की। बेंच ने हसीन जहां के वकील से सवाल किया, “क्या चार लाख रुपये मासिक इतनी बड़ी राशि नहीं है?” इसके बावजूद, कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शमी को व्यक्तिगत नोटिस और पश्चिम बंगाल सरकार को भी नोटिस जारी किया। राज्य सरकार को नोटिस इसलिए भेजा गया है क्योंकि मामला पश्चिम बंगाल के तहत आता है और इसमें स्थानीय कानूनी प्रक्रियाओं का जिक्र है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों से चार सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं की गई है, लेकिन यह मामला शमी के निजी जीवन और करियर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
शमी के करियर पर असर?
हाल ही में शमी को साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल नहीं किया गया, हालांकि उन्होंने बंगाल के लिए रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन किया था। यह विवाद उनके मानसिक और कानूनी तनाव को बढ़ा सकता है, जो उनके खेल प्रदर्शन को प्रभावित कर रहा है। शमी के वकील ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उम्मीद है कि वे कोर्ट में अपनी दलीलें मजबूती से रखेंगे।
यह मामला न केवल एक पारिवारिक विवाद का प्रतीक है, बल्कि उच्च कमाई वाले एथलीटों के लिए गुजारा भत्ते के निर्धारण में न्यायिक मानदंडों को भी परिभाषित कर सकता है। हसीन जहां की यह अपील भारतीय न्याय व्यवस्था में महिलाओं और बच्चों के आर्थिक अधिकारों की रक्षा के महत्व को रेखांकित करती है। जैसा कि मामले में प्रगति होती रहेगी, दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं और कोर्ट का अंतिम फैसला सभी के लिए रोचक रहेगा।
