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by-Ravindra Sikarwar

6 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के दौरान एक गंभीर घटना ने पूरे राज्य की राजनीति को हिला दिया। बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा प्रत्याशी विजय कुमार सिन्हा का काफिला लखीसराय जिले के खोरियारी गांव में हमले का शिकार हो गया। गुस्साए ग्रामीणों ने उनके वाहनों पर पत्थर, चप्पलें और गाय का गोबर फेंका, साथ ही “विजय सिन्हा मुर्दाबाद” के नारे लगाते हुए काफिले को रोक लिया। सिन्हा ने इसे विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के गुंडों का करतूत बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि यह विकास कार्यों की उपेक्षा के कारण उपजा आक्रोश था। कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन वाहनों को नुकसान पहुंचा। यह घटना न केवल चुनावी हिंसा का प्रतीक बनी, बल्कि बिहार की सड़कें, बुनियादी ढांचा और शासन व्यवस्था पर सवाल भी खड़े कर दी। आइए इस घटना की पूरी पृष्ठभूमि, परिस्थितियों, प्रतिक्रियाओं और इसके राजनीतिक निहितार्थों पर विस्तार से चर्चा करें।

घटना का पूरा विवरण: मतदान के बीच उभरा तनाव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में लखीसराय सहित 71 विधानसभा क्षेत्रों में सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हुआ था। विजय सिन्हा, जो लखीसराय सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं और इस बार भी भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, मतदान केंद्रों का दौरा करने निकले थे। दोपहर करीब 1 बजे वे खोरियारी गांव के बूथ नंबर 404 और 405 पहुंचे, जहां उन्होंने अपने मतदान एजेंटों के साथ स्थिति का जायजा लेने का प्रयास किया।

स्थानीय ग्रामीणों ने काफिले को घेर लिया और सड़क पर अवरोधक खड़े कर दिए। वीडियो फुटेज में साफ दिख रहा है कि भीड़ ने सिन्हा के बुलेटप्रूफ वाहन और अन्य गाड़ियों पर चप्पलें, पत्थर और गोबर फेंका। नारे लगे – “विजय सिन्हा मुर्दाबाद” और “कैंप लगाओ, समस्या सुनो”। काफिला करीब 20-25 मिनट तक रुका रहा, जिस दौरान पुलिसकर्मी भीड़ को नियंत्रित करने में जुटे रहे। सिन्हा को पैदल ही आगे बढ़ना पड़ा, और उनके सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सुरक्षित निकाला। घटना स्थल पर दो वाहनों की खिड़कियां टूट गईं, लेकिन सिन्हा या उनके सहयोगी सुरक्षित रहे।

सिन्हा ने तुरंत स्थानीय एसपी अजय कुमार से फोन पर बात की और घटना की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने दावा किया कि उनके मतदान एजेंटों को बूथों से बाहर निकाल दिया गया था और मतदाताओं को डराने की कोशिश की जा रही थी। “ये आरजेडी के गुंडे हैं, जो बूथ कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं गांव में घुस भी नहीं पा रहा,” सिन्हा ने कहा।

स्थानीय असंतोष: सड़कों और बुनियादी सुविधाओं की उपेक्षा
घटना के पीछे राजनीतिक साजिश से ज्यादा स्थानीय लोगों का लंबे समय से चला आ रहा गुस्सा लगता है। खोरियारी गांव के निवासी वर्षों से खराब सड़कों, टूटे नाले, बाढ़ प्रभावित इलाकों में जलभराव और बेरोजगारी की शिकायतें करते आ रहे हैं। एक ग्रामीण ने बताया, “10 साल से सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन न कोई सुनवाई न कोई काम। आज उपमुख्यमंत्री आए, तो हमने अपना दर्द दिखाया। ये गुंडागर्दी नहीं, न्याय की पुकार है।”

आरजेडी ने इसे सिन्हा की नाकामी का प्रमाण बताया। पार्टी के प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा, “सिन्हा झूठ बोल रहे हैं। उनके पास जेड श्रेणी की सुरक्षा है, फिर भी ये नाटक? ग्रामीणों ने टूटे नाले पर सवाल उठाए, तो हंगामा हो गया।” आरजेडी उम्मीदवार वीणा देवी ने तो यहां तक आरोप लगाया कि सिन्हा ने खुद ही यह ड्रामा रचा ताकि वोटों का ध्रुवीकरण हो। जामुई जिले में भी सिन्हा के काफिले पर पत्थरबाजी की सूचना मिली, जो मुनगर में भाजपा प्रत्याशी प्रमोद कुमार के काफिले पर हमले से मिलती-जुलती लगती है।

सिन्हा की तीखी प्रतिक्रिया: “गुंडों की छाती पर बुलडोजर चलाएंगे”
विजय सिन्हा ने घटना के बाद सोशल मीडिया और मीडिया को संबोधित करते हुए कड़ी चेतावनी दी। “एनडीए सरकार बिहार में वापस आएगी। इन गुंडों की छाती पर बुलडोजर चलाएंगे। जंगल राज कभी नहीं लौटने देंगे,” उन्होंने कहा। सिन्हा ने लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव पर सीधा निशाना साधा, “ये उनके इशारे पर करतूत कर रहे हैं। मतदान एजेंट को बूथ से निकाल दिया, वोट चोरी कर रहे हैं।” उन्होंने चुनाव आयोग से शिकायत करने का ऐलान किया और स्थानीय प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाया।

आरजेडी विधान परिषद सदस्य अजय कुमार के साथ सिन्हा का आमना-सामना भी हुआ। दोनों के काफिले टकराए, तो आपसी गाली-गलौज शुरू हो गई। सिन्हा ने कुमार को “अपराधी” कहा, तो कुमार ने सिन्हा को “नशेड़ी” करार दिया। वीडियो वायरल हो गया, जिसमें दोनों एक-दूसरे पर मतदाताओं को डराने का आरोप लगा रहे थे।

प्रशासन और चुनाव आयोग की कार्रवाई:
घटना की जानकारी मिलते ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बिहार के डीजीपी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। “कानून-व्यवस्था किसी को तोड़ने नहीं देंगे। दोषियों पर सख्ती होगी,” कुमार ने कहा। लखीसराय के जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्रा ने स्पष्ट किया, “प्रत्याशी को अपने क्षेत्र में घूमने का अधिकार है, लेकिन जनता भी अपनी समस्याएं रख सकती है। हम जांच कर रहे हैं और शांति सुनिश्चित करेंगे।” मुनगर के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल राकेश कुमार ने गांव का दौरा किया और स्थिति का आकलन किया।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को तितर-बितर किया, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। भाजपा ने इसे “चुनावी हिंसा” बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की, जबकि आरजेडी ने इसे “लोकतांत्रिक विरोध” कहा।

राजनीतिक संदर्भ: बिहार चुनाव में बढ़ता तापमान
यह घटना बिहार चुनाव 2025 के पहले चरण की तीव्रता को दर्शाती है। एनडीए (भाजपा-जदयू) और महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। सिन्हा का लखीसराय सीट पर मजबूत पकड़ माना जाता है, लेकिन स्थानीय मुद्दे जैसे बेरोजगारी, बाढ़ और विकास की कमी विपक्ष को हवा दे रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भागलपुर में अपनी रैली में आरजेडी पर “कुशासन” का हमला बोला, जबकि तेजस्वी यादव ने युवाओं को नौकरियों का वादा किया। मतदान प्रतिशत शाम 5 बजे तक 60.13% रहा, लेकिन हिंसा की खबरें मतदाताओं के मनोबल पर असर डाल सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं वोट बैंक को ध्रुवीकृत करती हैं। भाजपा इसे “जंगल राज” का प्रमाण बता रही है, जबकि आरजेडी इसे “जनाक्रोश” का नाम दे रही है। अगले चरणों में सुरक्षा बढ़ाने की मांग तेज हो गई है।

लोकतंत्र की परीक्षा में हिंसा का साया:
विजय सिन्हा के काफिले पर हमला बिहार की राजनीति में गहरते विभाजन का प्रतीक है। एक ओर जहां यह विकास की मांग का स्वर है, वहीं दूसरी ओर चुनावी रणनीति का हिस्सा भी लगता है। सिन्हा की चुनौतीपूर्ण लेकिन दृढ़ प्रतिक्रिया ने विवाद को और भड़का दिया, लेकिन आखिरकार लोकतंत्र में शांतिपूर्ण मतदान ही जीत का आधार है। चुनाव आयोग को अब न केवल इस घटना की निष्पक्ष जांच करनी होगी, बल्कि पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना होगा। बिहार के लोग विकास चाहते हैं, न कि हिंसा – यही संदेश इस घटना से निकलता है। यदि ऐसी घटनाएं रुकीं, तो चुनाव निष्पक्ष और परिणाम सकारात्मक होंगे।