मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के सुल्तानगंज में आयोजित श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पावन पर्व उस वक्त सियासी और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन गया, जब मंच से यादव समाज की धर्मशाला के निर्माण का मामला जोर-शोर से उठा। कार्यक्रम के दौरान दो साल पुरानी घोषणाओं पर सवाल खड़े हुए, जिसके बाद नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर शुरू हो गया।
मंच से उठा दो साल पुरानी घोषणाओं का मुद्दा
सुल्तानगंज बस स्टैंड पर हुए भव्य जन्मोत्सव कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल, सपा नेता गौरी यादव सहित विभिन्न दलों के नेता और यादव समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्र हुए थे। इसी दौरान युवा यादव महासभा के जिला मंत्री आशीष यादव ने मंच से तीखा सवाल उठाया कि बेगमगंज (2024) और सुल्तानगंज (2025) के जन्माष्टमी समारोहों के दौरान धर्मशाला के लिए 10 लाख रुपये देने का ऐलान किया गया था। इसके साथ ही पूर्व कैबिनेट मंत्री व पूर्व विधायक रामपाल सिंह राजपूत द्वारा समाज को धर्मशाला हेतु जमीन मुहैया कराने का वादा किया गया था, लेकिन धरातल पर अब तक जमीन न मिलने के कारण निर्माण कार्य पूरी तरह अटका हुआ है।
भाजपा और कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
मामला तूल पकड़ने पर भाजपा मंडल अध्यक्ष हरिराम यादव ने मंच से मोर्चा संभालते हुए पूर्व मंत्री रामपाल सिंह राजपूत की ओर से सफाई पेश की और कहा कि धर्मशाला के लिए जमीन आवंटन की प्रशासनिक प्रक्रिया अभी गतिमान है। वहीं, विवाद बढ़ता देख कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल ने स्पष्ट शब्दों में अपना रुख जाहिर किया। उन्होंने घोषणा की कि यदि शासन स्तर से सरकारी जमीन मिल जाती है तो ठीक, अन्यथा यादव समाज स्वयं जमीन का प्रबंध कर ले। विधायक ने मंच से दोहराया कि वे अपने वादे के मुताबिक 10 लाख रुपये का सहयोग तो देंगे ही, साथ ही समाज को जमीन खरीदने में भी आर्थिक मदद प्रदान करेंगे।
सियासत के बीच अधर में अटका धर्मशाला का निर्माण
जन्मोत्सव के मंच से उठे इस सुलगते मुद्दे ने अब तराई क्षेत्र की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक गलियारों और सामाजिक बैठकों में अब यही सवाल प्रमुखता से गूंज रहा है कि आखिर कब तक प्रशासनिक औपचारिकताओं का हवाला दिया जाता रहेगा और यादव समाज की बहुप्रतीक्षित धर्मशाला के लिए जमीन का आवंटन होकर निर्माण कार्य कब शुरू हो पाएगा।
