by-Ravindra Sikarwar
वाजपेयी सरकार (2002): पायलट प्रोजेक्ट और प्रारंभिक चरण
एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार द्वारा हुई थी।
- उद्देश्य: इस नीति का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देना, गन्ना किसानों की आय में वृद्धि करना और पर्यावरण प्रदूषण को कम करना था।
- 5% सम्मिश्रण: 3 सितंबर, 2002 को एक अधिसूचना जारी की गई, जिसमें 1 जनवरी, 2003 से नौ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में पेट्रोल में 5% एथेनॉल मिलाने को अनिवार्य कर दिया गया।
- प्रारंभिक राज्य: जिन राज्यों को इस चरण में शामिल किया गया था, उनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल प्रमुख थे।
इस कदम से यह स्पष्ट हो गया था कि भारत कच्चे तेल के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए जैव ईंधन (बायोफ्यूल) की ओर देख रहा है।
यूपीए सरकार (2004-2014): विस्तार और राष्ट्रीय नीति
मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने वाजपेयी सरकार द्वारा शुरू की गई इस नीति को आगे बढ़ाया।
- नीति का विस्तार: 27 अक्टूबर, 2004 को एक नई अधिसूचना जारी करके 5% एथेनॉल सम्मिश्रण को उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तरांचल) तक बढ़ाया गया।
- चरणबद्ध कार्यान्वयन: इसके बाद 2006 में 10 और राज्यों में इस नीति का विस्तार किया गया। इससे कुल मिलाकर 19 राज्य और 4 केंद्र शासित प्रदेश इसके दायरे में आ गए, जो देश भर में नीति को लागू करने का पहला बड़ा प्रयास था।
- राष्ट्रीय नीति का दर्जा: 3 जनवरी, 2013 को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत एक और महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई। इसमें तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को 10% तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचने का निर्देश दिया गया। इस कदम ने पहली बार एथेनॉल को एक राष्ट्रीय ईंधन नीति का दर्जा दिया।
यूपीए के कार्यकाल के दौरान, 10% सम्मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया गया, हालांकि कुछ आर्थिक और कृषि संबंधी चुनौतियों के कारण इसका पूर्ण कार्यान्वयन संभव नहीं हो पाया।
वर्तमान सरकार (2014 के बाद): त्वरित लक्ष्य और व्यापक कार्यान्वयन
2014 के बाद, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस नीति को और अधिक आक्रामक रूप से लागू किया।
- 20% का लक्ष्य: सरकार ने 20% एथेनॉल सम्मिश्रण (E20) के लक्ष्य को 2030 से बढ़ाकर 2025-26 तक कर दिया।
- नीतिगत सुधार: इस लक्ष्य को पाने के लिए एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) को नवंबर से अक्टूबर तक कर दिया गया, एथेनॉल की खरीद के लिए प्रशासनिक मूल्य तंत्र (administered price mechanism) की शुरुआत की गई और जीएसटी (GST) दर को 18% से घटाकर 5% कर दिया गया।
- उपलब्धि: इन प्रयासों के कारण, भारत ने निर्धारित समय से काफी पहले ही 20% एथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जिससे विदेशी मुद्रा में करोड़ों रुपये की बचत हुई है।
इस तरह, एथेनॉल सम्मिश्रण नीति की नींव वाजपेयी सरकार ने रखी, इसे यूपीए सरकार ने विस्तृत किया, और वर्तमान सरकार ने इसे गति देकर एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि में बदल दिया।
