रिपोर्टर: विपिन साहू
Starlink : भारत के सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेक्टर में वैश्विक दिग्गजों की एंट्री को लेकर हलचल तेज हो गई है। एलन मस्क की कंपनी ‘स्टारलिंक’ (Starlink) के भारतीय बाजार में प्रवेश की चर्चाओं के बीच मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली ‘रिलायंस इंडस्ट्रीज’ (Reliance Industries) ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। रिलायंस ने साफ किया है कि उसे किसी भी स्तर की प्रतिस्पर्धा से कोई भय नहीं है, बशर्ते सभी कंपनियों के लिए एक जैसे नियम और नीतियां लागू हों।
प्रतिस्पर्धा का स्वागत, लेकिन नियम सबके लिए एक समान
Starlink रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि वे सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में भारतीय और विदेशी दोनों प्रकार की कंपनियों के आगमन का स्वागत करते हैं।
समान अवसर: रिलायंस के अनुसार, भारत एक विशाल और उभरता हुआ बाजार है जहाँ निवेश और नई तकनीकों के लिए पर्याप्त अवसर हैं। * नियामकीय अनुपालन (Regulatory Compliance): कंपनी ने जोर देकर कहा कि देश में सेवा शुरू करने वाली हर कंपनी को भारत के कानूनों और नियामकीय प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन करना होगा।
मुख्य बिंदु: सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत विदेशी और घरेलू कंपनियों को समान कानूनी दायरे में रहकर ही कारोबार करना चाहिए।
जियो की सैटेलाइट सेवा भी मंजूरी के इंतजार में
Starlink रिलायंस ने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि उसकी अपनी सैटेलाइट सर्विस ‘जियो स्पेस फाइबर’ (JioSpaceFiber) भी आवश्यक सरकारी मंजूरियों की प्रक्रिया से गुजर रही है।
कंपनी का कहना है कि जिस तरह रिलायंस को भारतीय नियमों के तहत स्वीकृतियों का इंतजार करना पड़ रहा है, ठीक उसी तरह स्टारलिंक जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भी समान कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए।
2016 के सफर का दिया हवाला: ‘ग्राहक ही असली कसौटी’
Starlink मुकाबले से बेफिक्र रहने के अपने दावे को मजबूत करते हुए रिलायंस ने जियो की शुरुआत को याद किया:
- शून्य से शुरुआत: साल 2016 में जब जियो ने टेलीकॉम क्षेत्र में कदम रखा था, तब उसके पास एक भी उपभोक्ता नहीं था।
- 53 करोड़ से अधिक यूजर आधार: बेहतर सेवा और किफायती डेटा दरों के बल पर आज जियो 53 करोड़ से अधिक ग्राहकों का भरोसा जीत चुका है।
- सेवा की गुणवत्ता: रिलायंस का मानना है कि असली प्रतिस्पर्धा इस बात की है कि कौन सी कंपनी उपभोक्ताओं को सबसे बेहतर और भरोसेमंद सेवा प्रदान करती है।
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