by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर 2025 में भारत का दौरा करेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह बैठक 5 दिसंबर के आसपास होने की संभावना है, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। इस दौरे की घोषणा ने भारत और रूस के बीच “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” को फिर से रेखांकित किया है। पुतिन ने पीएम मोदी को अपना विश्वसनीय मित्र बताते हुए इस रिश्ते की गहराई को उजागर किया।
दौरे का उद्देश्य और पृष्ठभूमि:
भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है, जिसके तहत दोनों देशों के नेता हर साल एक-दूसरे के देशों का दौरा करते हैं। इस बार पुतिन का दौरा वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच हो रहा है, जिसमें यूक्रेन संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं शामिल हैं। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, और विज्ञान-प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करना होगा।
पिछले कुछ वर्षों में भारत और रूस ने अपने रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कई कदम उठाए हैं। रूस भारत का एक प्रमुख रक्षा साझेदार रहा है, और दोनों देश S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली, AK-203 राइफल उत्पादन, और संयुक्त सैन्य अभ्यास जैसे क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, ऊर्जा क्षेत्र में रूस भारत को कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
पुतिन और मोदी का व्यक्तिगत रिश्ता:
राष्ट्रपति पुतिन ने हाल ही में एक बयान में पीएम मोदी को अपना “विश्वसनीय मित्र” बताया, जो दोनों नेताओं के बीच गहरे व्यक्तिगत और कूटनीतिक रिश्तों को दर्शाता है। दोनों नेताओं ने पिछले कुछ वर्षों में कई बार मुलाकात की है, जिसमें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठकें, और अन्य वैश्विक मंच शामिल हैं। पुतिन ने भारत की तटस्थ और संतुलित विदेश नीति की सराहना की है, विशेष रूप से वैश्विक संकटों में भारत की मध्यस्थता की भूमिका को।
इस दौरे के दौरान दोनों नेता वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों, जैसे कि अफगानिस्तान, मध्य एशिया, और भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, पर भी चर्चा करेंगे। भारत ने हाल के वर्षों में रूस के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करते हुए पश्चिमी देशों के साथ भी संतुलन बनाए रखा है, जो इस दौरे का एक महत्वपूर्ण संदर्भ है।
प्रमुख चर्चा के बिंदु:
सूत्रों के अनुसार, इस शिखर सम्मेलन में निम्नलिखित मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
- रक्षा सहयोग: भारत और रूस के बीच रक्षा सौदों को और तेज करने की योजना है। S-400 मिसाइल सिस्टम की शेष डिलीवरी और अन्य हथियारों के संयुक्त उत्पादन पर चर्चा होगी।
- ऊर्जा सहयोग: रूस भारत को किफायती तेल और गैस की आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कुडनकुलम परियोजना को और विस्तार देने पर विचार होगा।
- व्यापार और निवेश: दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए नए व्यापार समझौतों और निवेश योजनाओं पर बात होगी।
- वैज्ञानिक सहयोग: अंतरिक्ष अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
- वैश्विक मुद्दे: दोनों नेता वैश्विक शांति, जलवायु परिवर्तन, और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पर विचार-विमर्श करेंगे।
सामरिक महत्व:
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर रूस-पश्चिम संबंधों में तनाव चरम पर है। भारत की तटस्थ नीति और रूस के साथ उसकी ऐतिहासिक मित्रता इस दौरे को विशेष महत्व देती है। भारत ने रूस के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए वैश्विक मंचों पर संतुलित रुख अपनाया है, जिसे पुतिन ने बार-बार सराहा है। यह दौरा भारत की “मल्टी-अलाइनमेंट” नीति का भी एक उदाहरण है, जिसमें वह रूस, अमेरिका, और अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखता है।
जनता और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया:
भारत में इस दौरे को लेकर उत्साह है, क्योंकि रूस के साथ मजबूत संबंध भारत की रक्षा और आर्थिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हैं। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह शिखर सम्मेलन भारत को वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर देगा। कुछ विश्लेषकों ने यह भी कहा कि भारत और रूस के बीच बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर भारत-प्रशांत क्षेत्र में।
राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने का एक अवसर है। पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को भी रेखांकित करेगी। यह शिखर सम्मेलन भारत-रूस मित्रता का एक और अध्याय लिखेगा, जो दशकों से विश्वास और सहयोग पर आधारित है।
