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रिपोर्टर: रविन्‍द्र सिंह

Rewa : प्रतिष्ठित संजय गांधी अस्पताल का एक हालिया मामला चिकित्सा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अस्पताल के प्रसव कक्ष (लेबर रूम) से सामने आए एक घटनाक्रम ने प्रसूताओं की सुरक्षा, निजता और गरिमा को लेकर जनसामान्य के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। प्रसव पीड़ा से गुजर रही मरीज कल्पना मिश्रा के दौरान सामने आई तस्वीरों के बाद अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।

प्रसव कक्ष में पुरुष कर्मियों की भूमिका और महिला स्टाफ की अनुपस्थिति पर उठे प्रश्न

Rewa संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं, विशेषकर प्रसव कक्ष में महिला डॉक्टरों और प्रशिक्षित महिला नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी अनिवार्य मानी जाती है। हालांकि, इस घटनाक्रम के दौरान प्रसूता की देखभाल में पुरुष कर्मचारी नजर आए। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वे पुरुष कर्मचारी योग्य चिकित्सक थे या फिर आउटसोर्सिंग के जरिए तैनात किए गए अप्रशिक्षित स्टाफ? यदि वे आउटसोर्स कर्मचारी थे, तो उन्हें प्रसव कक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किस आधार पर प्रवेश और जिम्मेदारी दी गई? इसके साथ ही, प्रसूता को संभालने के तरीके को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि देखभाल के बजाय मरीज के साथ अनुचित व्यवहार किया गया।

आउटसोर्स व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप

Rewa संजय गांधी अस्पताल में नियमित स्वास्थ्य कर्मियों के स्थान पर आउटसोर्स कर्मचारियों के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर पहले भी शिकायतें आती रही हैं। आलोचकों का मानना है कि महत्वपूर्ण विभागों को बाहरी स्टाफ के भरोसे छोड़ना मरीजों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। इसके अतिरिक्त, अस्पताल अधीक्षक की प्रशासनिक भूमिका भी सवालों के घेरे में है। लंबे समय से एक ही पद पर बने रहने और राजनीतिक संरक्षण के आरोपों के बीच यह मांग की जा रही है कि प्रबंधन के स्तर पर हुई चूकों का प्रशासनिक और तकनीकी ऑडिट कराया जाए।

उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता

Rewa किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में मरीज की निजता, सम्मान और चिकित्सकीय मानकों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम में प्रसव कक्ष में पुरुष कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति के नियम, घटना के समय ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टरों व नर्सों की उपस्थिति और आउटसोर्सिंग नीतियों की पारदर्शी जांच होना बेहद जरूरी है। शासन-प्रशासन को इस मामले का संज्ञान लेते हुए एक निष्पक्ष जांच समिति गठित करनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ नियम सम्मत कड़ी कार्रवाई की जा सके।

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