रिपोर्टर: अरविन्द सिंह
MPBDC : मध्य प्रदेश भवन विकास निगम (MPBDC) द्वारा कराए जा रहे सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुजालपुर और उज्जैन संभाग में अधिकारियों द्वारा किए गए अचानक निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं और घटिया सामग्री का उपयोग पकड़ा गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर ही मानक स्तर पर खरे न उतरने वाले निर्माण के हिस्से को तुड़वा दिया गया। इस पूरी कार्रवाई के बाद ठेकेदारों और संबंधित एजेंसियों में हड़कंप मच गया है, वहीं करोड़ों रुपये के बजट से बनने वाली सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
तकनीकी मानकों को दरकिनार कर किया जा रहा था निर्माण
MPBDC निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट पाया गया कि मौके पर जारी निर्माण कार्य तय तकनीकी गाइडलाइन्स और गुणवत्ता मानकों के अनुसार नहीं हो रहे थे। अधिकारियों की सख्ती के बाद जिस तरह से निर्मित ढांचे को गिराना पड़ा, उससे साफ जाहिर होता है कि घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर ढांचा खड़ा किया जा रहा था।
यह घटना दर्शाती है कि यदि उच्च स्तर से निरीक्षण न होता, तो यह कमजोर निर्माण पूरा करके जनता के उपयोग के लिए सौंप दिया जाता, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती।
निगरानी तंत्र और जांच एजेंसियों की विफलता पर सवाल
MPBDC निर्माण कार्य में इस स्तर की लापरवाही उजागर होने के बाद विभागीय इंजीनियर्स, साइट मैनेजर्स और गुणवत्ता जांच (Quality Control) से जुड़ी कंसल्टेंसी फर्मों की कार्यशैली संदेह के दायरे में है।
- निगरानी की अनदेखी: जब घटिया निर्माण हो रहा था, उस दौरान जिम्मेदार तकनीकी दल की अनुपस्थिति या अनदेखी पर सवाल उठ रहे हैं।
- भुगतान और स्वीकृति: मानकों के विपरीत काम होने के बावजूद किस आधार पर मापन पुस्तिका (MB) भरी जा रही थी और चरणबद्ध स्वीकृतियां दी जा रही थीं।
- संसाधनों का नुकसान: निर्माण के बाद ढांचे को ढहाना न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि पूरी मॉनिटरिंग प्रक्रिया की असफलता को दिखाता है।
बुधनी से शुजालपुर तक बार-बार दोहराई जा रही खामियां
MPBDC सरकारी परियोजनाओं में गुणवत्ता से जुड़ी यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व बुधनी स्थित ‘सीएम राइज स्कूल’ (CM Rise School) प्रोजेक्ट में भी निर्माण संबंधी गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं, जहां घटिया काम को हटाना पड़ा था।
बार-बार अलग-अलग जिलों से ऐसी शिकायतें सामने आना यह संकेत देता है कि समस्या किसी एक ठेकेदार या साइट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पर्यवेक्षण ढांचे में सुधार की आवश्यकता है। अब देखने योग्य विषय यह होगा कि विभाग केवल ठेकेदारों पर पेनाल्टी लगाकर मामले को शांत करता है या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।
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