Delhi : शनिवार को लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई, लेकिन इसके साथ ही महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि इस विधेयक के पीछे सरकार की मंशा महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए परिसीमन का खेल खेलना है।

Delhi प्रियंका गांधी का हमला: “आरक्षण नहीं, यह परिसीमन की साजिश है”
संसद सत्र के समापन के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार जिसे महिला आरक्षण बिल बता रही है, वह वास्तव में ‘परिसीमन बिल’ है। प्रियंका ने दावा किया कि सरकार इस विधेयक की आड़ में परिसीमन की प्रक्रिया को थोपकर चुनावी समीकरणों को प्रभावित करना चाहती है। उन्होंने सरकार को चुनौती दी कि यदि वे वाकई गंभीर हैं, तो 2023 के पुराने महिला आरक्षण कानून को बिना किसी शर्त के तुरंत लागू करें, जिसका विपक्ष भी पूर्ण समर्थन करेगा।
Delhi बीजेपी का पलटवार: राज्यों में पारित होंगे ‘निंदा प्रस्ताव’
विपक्ष के कड़े रुख और विधेयक के गिरने से नाराज भारतीय जनता पार्टी ने अब आक्रामक रणनीति अपनाई है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक उच्च स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इस बैठक में निर्देश दिया गया है कि सभी बीजेपी शासित राज्य अपनी विधानसभाओं का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाएं। इन सत्रों में महिला आरक्षण और विकास कार्यों में बाधा डालने के लिए विपक्ष के खिलाफ “निंदा प्रस्ताव” पारित किया जाएगा, ताकि जनता के बीच विपक्ष की ‘महिला विरोधी’ छवि को उजागर किया जा सके।

Delhi संसद के सातवें सत्र का रिपोर्ट कार्ड: 93% उत्पादकता
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही स्थगित करने से पहले सत्र का विवरण प्रस्तुत किया। भले ही महिला आरक्षण विधेयक पारित नहीं हो सका, लेकिन सदन के कामकाज का आंकड़ा सकारात्मक रहा:

- कुल बैठकें: 18वीं लोकसभा के इस सत्र में कुल 31 बैठकें आयोजित की गईं।
- कार्य अवधि: सदन की कार्यवाही कुल 151 घंटे और 42 मिनट तक चली।
- उत्पादकता: विपक्ष के हंगामे और चर्चाओं के बीच सदन की कार्य उत्पादकता 93 प्रतिशत दर्ज की गई।
Delhi परिसीमन बनाम सशक्तिकरण: भविष्य की राह
मौजूदा विवाद की जड़ ‘परिसीमन’ प्रक्रिया है। विपक्ष को डर है कि जनगणना के बाद होने वाला परिसीमन दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक शक्ति को कम कर सकता है और चुनावी गणित को बदल सकता है। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सीटों का नए सिरे से निर्धारण (Delimitation) अनिवार्य है। अब यह मुद्दा संसद की चौखट से निकलकर राज्यों की विधानसभाओं और आगामी चुनावों में जनता की अदालत तक जाने वाला है।
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