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रिपोर्टर: सन्‍तोष सरावगी

Pichhore : डबरा जिले की पिछोर तहसील में रेत माफिया के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से अवैध उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। माफियाओं द्वारा खनिज संपदा की खुलेआम चोरी कर सरकार को राजस्व की भारी क्षति पहुँचाई जा रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।

Pichhore मिलीभगत का आरोप: पुलिस और प्रशासन पर उठे सवाल

क्षेत्र के लोगों का सीधा आरोप है कि तहसीलदार, खनिज विभाग और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर रेत के डंप लगाना संभव नहीं है। माफियाओं ने अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर क्षेत्र में रेत के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगा दिए हैं, जिससे सरकारी खजाने को सीधे तौर पर “चूना” लगाया जा रहा है।

Pichhore इन गांवों में लगे हैं रेत के विशाल भंडार

अवैध उत्खनन का सबसे बुरा प्रभाव नदी किनारे बसे ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। पिछोर के बाबूपुर, कीरोल, कैंथोद और निजामपुर जैसे गांवों में नदी के किनारों पर माफियाओं ने रेत का अवैध भंडारण (डंप) कर रखा है। रात-दिन मशीनों के जरिए रेत निकाली जा रही है, जिससे पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुँच रहा है।

Pichhore कार्रवाई का इंतजार: क्या जागेगा प्रशासन?

हैरानी की बात यह है कि सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में मामला होने के बावजूद वरिष्ठ अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि क्या सरकार इन रसूखदार माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कसेगी या खनिज संपदा की यह लूट यूँ ही जारी रहेगी? अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कब संज्ञान लेता है।

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