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रिपोर्टर: टुनटुन कुमार

Motihari : बिहार के पूर्वी चंपारण जिला मुख्यालय मोतिहारी से खाकी को शर्मसार करने वाला एक मामला प्रकाश में आया है, जहां पुलिसकर्मी द्वारा एक व्यक्ति की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना चिरैया थाना परिसर के मुख्य द्वार के बाहर की बताई जा रही है। यद्यपि इस वायरल वीडियो की अभी तक आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पुलिस कप्तान ने संज्ञान लिया है और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

शराब के नशे में गाली-गलौज करने का आरोप, तीन महीने पुराना बताया जा रहा है मामला

Motihari पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना लगभग तीन माह पुरानी बताई जा रही है। तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर (एसआई) मधुकर कुमार शराब के नशे में धुत एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर चिरैया थाना लाए थे। आरोप है कि वह व्यक्ति पुलिस की अभिरक्षा में होने के बावजूद लगातार पुलिसकर्मियों के साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग और गाली-गलौज कर रहा था। स्थिति को देखते हुए अपर थानाध्यक्ष ने उसे परिसर से बाहर जाने को कहा, लेकिन बाहर निकलने के बाद भी जब उसका गाली-गलौज बंद नहीं हुआ, तो गुस्से में आकर पुलिसकर्मी द्वारा उसकी पिटाई कर दी गई।

एसपी स्वर्ण प्रभात का कड़ा एक्शन, एसआई मधुकर कुमार से मांगा लिखित जवाब

Motihari घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर तेजी से फैला, पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वर्ण प्रभात ने मामले को तुरंत संज्ञान में लिया। एसपी ने संबंधित एसआई मधुकर कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूरी घटना पर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है। जिला पुलिस प्रमुख की ओर से यह साफ किया गया है कि आरोपी अधिकारी का जवाब मिलने और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही नियमानुसार आगे की अनुशासनात्मक या विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

निष्पक्ष विभागीय जांच जारी, प्रत्यक्षदर्शियों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई

Motihari इस पूरे प्रकरण में किसी भी अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा निष्पक्ष विभागीय जांच कराई जा रही है। जांच के दौरान कथित पीड़ित व्यक्ति द्वारा की गई गाली-गलौज तथा पुलिसकर्मी द्वारा किए गए बल प्रयोग, दोनों ही पहलुओं का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है। मामले की सच्चाई तक पहुंचने के लिए मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, थाना परिसर व आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और संबंधित पुलिस अधिकारियों के बयानों को जांच का मुख्य आधार बनाया गया है।

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