रिपोर्टर रविन्द्र सिंह
Akola : हाराष्ट्र के अकोला जिले से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और मानवीय संवेदनहीनता को कटघरे में खड़ा करने वाला एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। यहाँ के एक सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंची एक आदिवासी महिला को अपने बीमार पति के लिए न तो स्ट्रेचर मिला और न ही व्हीलचेयर। लाचार होकर महिला अपने पति को पीठ पर उठाकर अस्पताल के गलियारों में डॉक्टरों और वार्डों के चक्कर काटती रही। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य प्रशासन के खिलाफ लोगों में भारी आक्रोश है।
Akola मासूम बच्चे के साथ कमरों के चक्कर काटती रही बेबस पत्नी
वायरल वीडियो अकोला स्थित ‘शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय’ (GMC) का बताया जा रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि महिला के आगे एक बैग लटका हुआ है और उसकी पीठ पर उसका बीमार पति लदा है। महिला के साथ उसका एक छोटा बच्चा भी है। वह बेबसी की हालत में अस्पताल के अलग-अलग कमरों में जा रही है ताकि उसके पति को समय पर इलाज मिल सके।
अस्पताल परिसर में दर्जनों लोग और सुरक्षाकर्मी मौजूद थे। वीडियो में एक गार्ड महिला को रास्ता तो बताता है, लेकिन उसकी मदद के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ाता। किसी भी कर्मचारी या आम नागरिक ने महिला को स्ट्रेचर लाकर देने या उसके पति को उठाने में कोई रुचि नहीं दिखाई।
Akola अस्पताल प्रशासन की सफाई: डीन ने दागे उल्टे सवाल
मामला तूल पकड़ने और वीडियो वायरल होने के बाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय सोनूने ने अस्पताल का बचाव करते हुए एक विवादित बयान दिया है, जिसमें उन्होंने इस पूरी घटना के लिए सीधे तौर पर महिला को ही जिम्मेदार ठहराने का प्रयास किया। डीन ने ओपीडी समय का हवाला देते हुए कहा कि महिला ओपीडी (OPD) का समय खत्म होने के बाद अस्पताल पहुंची थी और उसने स्ट्रेचर या व्हीलचेयर के लिए वहां तैनात कर्मचारियों या रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (RMO) से सीधे संपर्क भी नहीं किया था। इसके अलावा उन्होंने यह तर्क भी दिया कि महिला ने इलाज शुरू होने से पहले जरूरी पहचान पत्र और आवश्यक दस्तावेज भी पूरे नहीं किए थे।
Akola “संस्थान को बदनाम करने की साजिश”
अस्पताल के डीन डॉ. संजय सोनूने ने अपनी लापरवाही स्वीकार करने के बजाय आरोप लगाया कि इस घटना का इस्तेमाल मेडिकल कॉलेज की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा हमारे संस्थान को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। वीडियो में पीछे से कुछ आवाजें भी आ रही हैं जो लोगों से रिकॉर्डिंग न करने की बात कह रही हैं।”
प्रशासन भले ही अपनी सफाई दे रहा हो, लेकिन इस वीडियो ने एक बार फिर दावों और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े अंतर को उजागर कर दिया है।
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