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by-Ravindra Sikarwar

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) विकास नीति 2025 को औपचारिक रूप से लॉन्च किया है। यह नई नीति राज्य में एमएसएमई क्षेत्र में पिछले दो वर्षों से जारी पंजीकरण में कमी और इकाइयों के बंद होने की समस्या का समाधान करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। नीति का मुख्य फोकस उत्पादकता में वृद्धि, नवाचार को प्रोत्साहन और व्यवसाय अनुकूल माहौल बनाने पर है, जिससे राज्य की आर्थिक वृद्धि को गति मिल सके।

नीति की पृष्ठभूमि और आवश्यकता:
पिछले दो वर्षों में मध्य प्रदेश में एमएसएमई पंजीकरण में लगभग 15-20% की गिरावट दर्ज की गई है। कोविड-19 के बाद की आर्थिक चुनौतियों, कच्चे माल की बढ़ती लागत, बाजार में प्रतिस्पर्धा और वित्तीय बाधाओं के कारण कई छोटे उद्यम बंद हो गए। राज्य सरकार ने एक व्यापक सर्वेक्षण के आधार पर इस नीति को तैयार किया, जिसमें उद्यमियों, विशेषज्ञों और उद्योग संगठनों की राय ली गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लॉन्च समारोह में कहा, “एमएसएमई राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यह नीति उन्हें मजबूत बनाने और नई ऊंचाइयों तक ले जाने का माध्यम बनेगी।”

नीति के प्रमुख घटक:
एमएसएमई विकास नीति 2025 में कई नवीन प्रावधान शामिल हैं, जो उद्यमियों को समग्र सहायता प्रदान करेंगे:

  • उत्पादकता में सुधार: नीति के तहत, राज्य सरकार एमएसएमई इकाइयों को आधुनिक मशीनरी और तकनीक अपनाने के लिए सब्सिडी प्रदान करेगी। 50% तक पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध होगी, साथ ही कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे उत्पादन क्षमता में 25-30% की वृद्धि की उम्मीद है।
  • नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा: नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए, नीति में ‘इनोवेशन फंड’ की स्थापना का प्रावधान है, जिसमें प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स को ₹5 लाख तक का अनुदान मिलेगा। एमएसएमई को R&D (अनुसंधान एवं विकास) के लिए 40% कर छूट और पेटेंट पंजीकरण में सहायता प्रदान की जाएगी। विशेष रूप से, इंदौर और भोपाल जैसे औद्योगिक केंद्रों में इनोवेशन हब स्थापित किए जाएंगे।
  • व्यवसाय अनुकूल माहौल: व्यवसाय करने की आसानी को बढ़ाने के लिए, सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को मजबूत किया जाएगा, जिसमें सभी अनुमतियां 30 दिनों के भीतर मिलेंगी। भूमि आवंटन में प्राथमिकता, बिजली सब्सिडी (पहले वर्ष 50% तक) और पर्यावरण अनुपालन में सहायता जैसे उपाय शामिल हैं। नीति में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ इंडेक्स में सुधार के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत भी की गई है।
  • आर्थिक वृद्धि पर अपेक्षित प्रभाव: यह नीति राज्य की जीडीपी में एमएसएमई के योगदान को 25% से बढ़ाकर 35% करने का लक्ष्य रखती है। अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में 50,000 नई एमएसएमई इकाइयों का पंजीकरण होगा, जिससे 2 लाख से अधिक रोजगार सृजन होगा। विशेष रूप से, ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में क्लस्टर विकास पर जोर दिया गया है, जैसे मुरैना में हैंडलूम क्लस्टर और रतलाम में मसाला प्रसंस्करण इकाइयां।
  • उद्यमियों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया: नीति के लॉन्च पर उद्यमियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। इंदौर के एक एमएसएमई मालिक, विजय कुमार ने कहा, “पिछले दो वर्षों में हमारी इकाई संकट में थी, लेकिन यह नीति हमें नई जान देगी। सब्सिडी और प्रशिक्षण से हम प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।” एक आर्थिक विशेषज्ञ, डॉ. रीना शर्मा ने बताया, “यह नीति केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ती हुई है और राज्य स्तर पर व्यावहारिक समाधान प्रदान करती है।”
  • सरकार की कार्यान्वयन योजना: मध्य प्रदेश सरकार ने नीति के कार्यान्वयन के लिए एक विशेष कार्य बल गठित किया है, जिसमें उद्योग विभाग, वित्त विभाग और एमएसएमई एसोसिएशन के प्रतिनिधि शामिल हैं। पहले वर्ष में 100 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। नियमित मॉनिटरिंग और फीडबैक सिस्टम के माध्यम से नीति की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा।

एमएसएमई विकास नीति 2025 मध्य प्रदेश के छोटे उद्यमों को सशक्त बनाने का एक क्रांतिकारी कदम है। उत्पादकता, नवाचार और व्यवसाय अनुकूल माहौल पर केंद्रित यह नीति न केवल पंजीकरण में गिरावट को रोकेगी, बल्कि राज्य की आर्थिक वृद्धि को नई दिशा देगी। सरकार की यह पहल उद्यमियों के लिए नई आशा की किरण है, जो मध्य प्रदेश को औद्योगिक हब बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

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