रिपोर्टर: प्रदीप बंसल
Machalpur : क्षेत्र में कीमती और संरक्षित प्रजातियों के पेड़ों पर लकड़ी तस्करों की पैनी नजर बनी हुई है। अवैध कटाई के इस कारोबार को छिपाने के लिए तस्कर अब नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कानूनी रूप से छूट प्राप्त बबूल के पेड़ों की आड़ में प्रतिबंधित प्रजातियों के बेशकीमती पेड़ों की धड़ल्ले से कटाई की जा रही है।
बबूल की आड़ में कीमती पेड़ों की अंधाधुंध कटाई
वन क्षेत्र और आसपास के इलाकों में अवैध कटाई करने वाला सिंडिकेट सक्रिय है। तस्कर नियमों का फायदा उठाकर बबूल की लकड़ी की आड़ लेते हैं और उसी के साथ शीशम, सागौन व अन्य संरक्षित पेड़ों की लकड़ियों को छुपाकर काट लेते हैं। इस चालाकी के कारण पहली नज़र में देखने पर यह सिर्फ सामान्य बबूल की लकड़ी प्रतीत होती है, जिससे चेकिंग के दौरान बच निकलना आसान हो जाता है।
रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से आरा मशीनों तक सप्लाई
इस अवैध कारोबार का परिवहन तंत्र भी पूरी तरह योजनाबद्ध है। कटी हुई प्रतिबंधित लकड़ियों को रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लादकर चोरी-छिपे स्थानीय आरा मशीनों (Sawmills) तक पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि देर रात लकड़ियों से लदी गाड़ियों की आवाजाही बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय आरा मशीनों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच की उठती मांग और वन विभाग का कड़ा रुख
बढ़ते अवैध कटाई के मामलों को देखते हुए स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से आरा मशीनों और लकड़ी के परिवहन की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, इस पूरे मामले पर वन विभाग के रेंजर ने स्पष्ट किया है कि विभाग अवैध कटाई को लेकर पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त बढ़ाई गई है और नियमों का उल्लंघन करने वाले तस्करों व आरा मशीन संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।

