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अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम के कायाकल्प के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब एक और बड़े धार्मिक प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ २० जुलाई २०२६ (सोमवार) को बाराबंकी में स्थित ऐतिहासिक लोधेश्वर महादेव मंदिर कॉरिडोर की आधारशिला रखेंगे। राज्य में २०२७ में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस प्रोजेक्ट को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और सरकार की कोशिश चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले इसका उद्घाटन करने की है।

कॉरिडोर के जरिए ओबीसी (OBC) वोट बैंक को साधने की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कॉरिडोर के निर्माण के पीछे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के साथ-साथ एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी छिपा है।

  • जातीय समीकरण: बाराबंकी समेत उन्नाव, बांदा, जालौन, कानपुर, हमीरपुर और कालपी जैसे जिलों के पिछड़ा वर्ग (OBC) के लोग लोधेश्वर महादेव को अपना कुलदेवता मानते हैं।
  • कांवड़ियों की भारी आस्था: सावन के पवित्र महीने और महाशिवरात्रि के दौरान इन क्षेत्रों से लोध, गुर्जर, तोमर और पाल समाज के श्रद्धालु व कांवड़िये लाखों की संख्या में यहाँ जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
  • सियासी पलटवार: माना जा रहा है कि इस भव्य धार्मिक गलियारे के जरिए भाजपा विपक्षी दलों के सामाजिक और जातीय गठबंधनों में प्रभावी सेंध लगाने की तैयारी में है।

₹२०० करोड़ का बजट, २० बीघा में आकार लेगा भव्य परिसर

लोधेश्वर महादेव मंदिर कॉरिडोर को बेहद आधुनिक और भव्य रूप दिया जा रहा है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • विस्तार: यह पूरा कॉरिडोर लगभग २० बीघा क्षेत्र में फैला होगा।
  • मुआवजा और जमीन: प्रोजेक्ट के लिए मंदिर के आसपास से १२७ अवैध और वैध निर्माणों को हटाया गया है। जिनके पास वैध दस्तावेज थे, उन्हें कुल ₹४८ करोड़ का मुआवजा वितरित कर मकान-दुकान खाली कराए गए हैं।
  • बजट: उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरे मेगा प्रोजेक्ट के लिए ₹२०० करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है।

श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं और अमृत सरोवर का सुंदरीकरण

कॉरिडोर के भीतर आने वाले समय में श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन की सुविधाएं मिलेंगी। इसके तहत मुख्य मंदिर के चारों ओर एक भव्य परिक्रमा मार्ग, प्रवेश के लिए आकर्षक मुख्य द्वार, यात्रियों के ठहरने के लिए आधुनिक विश्राम गृह, क्लॉक रूम (सामान रखने का कक्ष) और टॉयलेट्स ब्लॉक का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही परिसर में स्थित प्राचीन अमृत सरोवर का भी नए सिरे से सुंदरीकरण किया जाएगा।

शिलान्यास कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाराबंकी में एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे। सरकार का दावा है कि इस कॉरिडोर के बनने से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बाराबंकी और आसपास के जिलों में स्थानीय व्यापार, होटल इंडस्ट्री और रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। गौरतलब है कि इसी तर्ज पर मथुरा में भी बांके बिहारी कॉरिडोर को लेकर तेजी से काम चल रहा है।