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by-Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कुना नेशनल पार्क, जो भारत में चीतों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है, आज 1 अक्टूबर 2025 से पर्यटकों के लिए फिर से खुल गया है। तीन महीने लंबे मानसून अवकाश (1 जुलाई से 30 सितंबर तक) के बाद यह पार्क अब वन्यजीव प्रेमियों के लिए तैयार है, जहां 16 चीते खुले जंगलों में स्वतंत्र विचरण कर रहे हैं। सरकारी निर्देशों के अनुसार, पार्क का यह पुनर्क्रमण न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि चीता संरक्षण परियोजना को भी नई गति प्रदान करेगा।

कुना नेशनल पार्क की स्थापना 1981 में हुई थी, जो मूल रूप से एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में जाना जाता था। 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नामीबिया से लाए गए आठ चीतों की रिहाई के बाद यह पार्क वैश्विक स्तर पर चर्चा में आ गया। अब तक यहां जन्मे 16 चीते भी शामिल हो चुके हैं, जो कुल संख्या को 24 तक पहुंचा चुके हैं, हालांकि कुछ की मृत्यु भी दर्ज की गई है। हाल ही में एक ऐतिहासिक क्षण आया जब नामीबियाई चीता ज्वाला की बेटी ‘मुखी’ ने 29 सितंबर 2025 को वयस्कता प्राप्त की। यह भारत में जन्मा पहला चीता है जो 30 महीने की उम्र में वयस्क बना, जो प्रजनन कार्यक्रम की सफलता का प्रतीक है। पर्यटक अब इन दुर्लभ जीवों को प्राकृतिक वातावरण में देख सकेंगे, जो भारत में पहली बार संभव हो रहा है।

पार्क में प्रवेश तीन मुख्य द्वारों—अहीरा (अहेरा), पीपलवाड़ी (पीपलबावड़ी) और टिक्टोली—के माध्यम से संभव है। चीता सफारी सुबह 6:30 बजे से शुरू होकर 10:30 बजे तक चलेगी, जबकि शाम की सफारी दोपहर 3 बजे से 6 बजे तक उपलब्ध होगी। अक्टूबर और फरवरी से जून के बीच सुबह की बुकिंग 6 से 6:30 बजे तक, तथा नवंबर से जनवरी में 6:30 से 7 बजे तक की जाएगी। शाम की सफारी हर बुधवार बंद रहेगी। टिक्टोली द्वार पर केवल पंजीकृत जिप्सी की अनुमति है, जबकि अन्य द्वारों पर हल्के मोटर वाहन (अधिकतम छह व्यक्ति) और जिप्सी का उपयोग किया जा सकता है।

बुकिंग की प्रक्रिया सरल बनाई गई है। पर्यटक एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं या द्वारों पर ही ऑफलाइन अनुमति प्राप्त कर सकते हैं। जिप्सी के लिए शुल्क 4,500 रुपये (छह व्यक्तियों के लिए) तथा स्वयं के वाहन के लिए 1,200 रुपये निर्धारित है। वैकल्पिक रूप से, जिप्सी का किराया 2,500 रुपये और गाइड शुल्क 800 रुपये अलग से लिया जाएगा। वन विभाग ने आधिकारिक वेबसाइट को अपडेट कर दिया है और पूछताछ के लिए हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किया है। उत्सव सीजन—नवरात्रि और दशहरा—के दौरान बुकिंग्स में भारी उछाल की उम्मीद है, क्योंकि पिछले वर्षों में पार्क ने हजारों आगंतुकों को आकर्षित किया था। पर्यटन विभाग ‘कुना रिट्रीट’ नामक एक नई सुविधा की योजना बना रहा है, जिसमें ठहरने और भोजन की व्यवस्था शामिल होगी, ताकि पर्यटकों का अनुभव और समृद्ध हो सके।

पर्यटकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। वाहन की गति 20 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए, हल्के रंग के कपड़े पहनें, पेयजल साथ लाएं, और संदिग्ध गतिविधि पर वन अधिकारियों को सूचित करें। जानवरों को रास्ता देना अनिवार्य है, जबकि कचरा फेंकना, संगीत उपकरण ले जाना, बिना निर्देश के वाहन से उतरना, या जानवरों को परेशान करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल कैमरे का उपयोग अनुमत है; हथियारों का कोई स्थान नहीं।

यह पुनर्क्रमण न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद होगा, बल्कि चीता संरक्षण के प्रति जागरूकता भी फैलाएगा। वर्तमान में भारत-बोत्सवाना के बीच आठ और चीतों के आयात पर बातचीत अंतिम चरण में है, जो पार्क की क्षमता को और मजबूत करेगी। वन्यजीव प्रेमी जल्दी बुकिंग करें, क्योंकि सीमित स्लॉट्स के कारण जल्द ही भराव हो सकता है। कुना नेशनल पार्क अब फिर से भारत की वन्य संपदा का एक जीवंत प्रतीक बन गया है।

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