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by-Ravindra Sikarwar

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने “निर्माण उल्लंघनों” के कारण एक 26-मंजिला टावर को ध्वस्त करने का आदेश दिया है। इस फैसले को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो अवैध निर्माणों के खिलाफ एक सख्त संदेश देता है।

मामले का विवरण:
यह मामला कोलकाता के न्यू टाउन क्षेत्र में स्थित ‘द लेक व्यू’ नामक आवासीय परिसर से संबंधित है। अदालत ने पाया कि इस टावर का निर्माण पश्चिम बंगाल हाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (HIDCO) द्वारा अनुमोदित योजना के अनुसार नहीं किया गया था। निर्माणकर्ता कंपनी पर आरोप है कि उसने निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन करते हुए अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया, जिससे भवन की संरचनात्मक स्थिरता और सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो गया।

अदालत का फैसला:
न्यायमूर्ति संजीव बनर्जी और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि “अवैध निर्माण को नियमित करना जनहित के खिलाफ है और यह भविष्य में ऐसे उल्लंघनों को प्रोत्साहित करेगा।” अदालत ने निर्माणकर्ता कंपनी को टावर को 90 दिनों के भीतर पूरी तरह से ध्वस्त करने का आदेश दिया है। इसके अलावा, अदालत ने HIDCO को भी फटकार लगाई और पूछा कि उसने समय रहते इस अवैध निर्माण को क्यों नहीं रोका।

प्रभाव और प्रतिक्रिया:
इस फैसले से टावर में फ्लैट खरीदने वाले सैकड़ों खरीदारों में हड़कंप मच गया है। कई खरीदारों ने अपनी गाढ़ी कमाई इस परियोजना में लगाई थी। हालांकि, अदालत ने खरीदारों को राहत देते हुए निर्माणकर्ता कंपनी को आदेश दिया है कि वह सभी खरीदारों को उनके द्वारा भुगतान की गई पूरी राशि ब्याज सहित वापस करे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन बिल्डरों के लिए एक चेतावनी है जो नियमों और विनियमों की अनदेखी करते हैं। यह फैसला भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मिसाल कायम करेगा। यह दिखाता है कि न्यायपालिका अवैध निर्माणों के प्रति कितनी गंभीर है और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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