Anasara : पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में हर वर्ष होने वाला देव स्नान (स्नान पूर्णिमा) भगवान जगन्नाथ की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक है। इस विशेष अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान सुदर्शन का 108 पवित्र कलशों के जल से अभिषेक किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस महास्नान के बाद महाप्रभु अस्वस्थ हो जाते हैं, जिसके कारण मंदिर के कपाट लगभग 15 दिनों तक आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं।
आइए जानते हैं इस परंपरा का महत्व, मंदिर कब खुलेगा और भक्तों को दोबारा दर्शन कब प्राप्त होंगे।
Anasara देव स्नान के बाद क्यों बंद हो जाते हैं मंदिर के कपाट?
ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन आयोजित होने वाले देव स्नान उत्सव में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन चक्र का 108 कलशों के सुगंधित एवं पवित्र जल से अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि लंबे समय तक स्नान कराने के कारण भगवान को ज्वर (बुखार) हो जाता है।
इसके बाद महाप्रभु को मंदिर के गर्भगृह में विश्राम के लिए ले जाया जाता है। इस अवधि को अनसर काल कहा जाता है। इस दौरान मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं और केवल सेवायत पुजारी ही वैद्य की तरह भगवान की सेवा और उपचार करते हैं।
यह विश्राम काल लगभग 15 दिनों तक चलता है।
Anasara 15 दिनों बाद कब होंगे भगवान जगन्नाथ के दर्शन?
अनसर काल समाप्त होने के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के स्वस्थ होने की मान्यता है। इसके बाद रथ यात्रा से एक दिन पहले नवयौवन दर्शन का आयोजन होता है।
इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं को लंबे अंतराल के बाद महाप्रभु के दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है। अगले दिन भगवान अपने भाई-बहन के साथ भव्य रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं।
Anasara जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 कब होगी?
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 15 जुलाई 2026 को सुबह 11:50 बजे शुरू होगी और 16 जुलाई 2026 को सुबह 8:52 बजे समाप्त होगी।
इसी आधार पर जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी। यह पवित्र यात्रा 16 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई 2026 को बहुदा यात्रा के साथ संपन्न होगी।
Anasara रथ यात्रा की खास परंपराएं
- भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा विशाल रथों पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं।
- रथों को हजारों श्रद्धालु रस्सियों की मदद से खींचते हैं।
- इस यात्रा में घोड़े या हाथी जैसे किसी भी पशु का उपयोग नहीं किया जाता।
- रथ यात्रा शुरू होने से पहले परंपरा के अनुसार मार्ग को सोने की झाड़ू से साफ किया जाता है, जिसे छेरा पहंरा की रस्म कहा जाता है।
Anasara धार्मिक मान्यता
देव स्नान, अनसर काल, नवयौवन दर्शन और रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ की वार्षिक लीलाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। इन परंपराओं में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होकर महाप्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक जानकारी प्रदान करना है।

