Kite festival: सोमवार को अहमदाबाद का माहौल खास नजर आया, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज एक साथ शहर के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों पर पहुंचे। सुबह की हल्की ठंड, साबरमती नदी का शांत वातावरण और दो देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने इस दौरे को यादगार बना दिया।
Kite festival: साबरमती आश्रम से दौरे की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अपने गुजरात दौरे की शुरुआत साबरमती आश्रम से की। दोनों नेताओं ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके चित्र पर सूत चढ़ाया।
आश्रम परिसर में कुछ समय बिताते हुए उन्होंने बापू के जीवन, संघर्ष और उनके विचारों को नजदीक से जाना।
Kite festival: गेस्ट बुक में चांसलर मर्ज का संदेश
आश्रम भ्रमण के बाद जर्मन चांसलर ने गेस्ट बुक में अपने विचार साझा किए। उन्होंने लिखा कि महात्मा गांधी की अहिंसा की सोच, स्वतंत्रता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा में विश्वास आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है।
उन्होंने यह भी कहा कि न्याय और संवाद पर आधारित गांधीजी की विचारधारा वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई है।
इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल में रंगीन आसमान
साबरमती आश्रम के बाद दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे, जहां इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल 2026 का आयोजन हो रहा है। सात दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में देश और विदेश से आए कलाकार व पतंगबाज हिस्सा ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर मर्ज ने भी साथ मिलकर पतंग उड़ाई। यह दृश्य सिर्फ उत्सव का प्रतीक नहीं था, बल्कि संस्कृति के माध्यम से आपसी मित्रता और सहयोग का संदेश भी देता नजर आया।
मेट्रो यात्रा और अहम वार्ता की तैयारी
पतंग महोत्सव के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अहमदाबाद के पुराने हाईकोर्ट मेट्रो स्टेशन से मेट्रो यात्रा कर गांधीनगर के महात्मा मंदिर तक का सफर किया।
महात्मा मंदिर में भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है, जिसमें आर्थिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
गुजरात दौरे का अंतिम दिन
कार्यक्रमों के समापन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर करीब 2:30 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगे। इसके साथ ही उनका गुजरात दौरे का तीसरा और अंतिम दिन पूरा होगा।
इस पूरे दौरे ने यह संदेश दिया कि कूटनीति सिर्फ बैठकों तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कृति और साझा मूल्यों के जरिए भी मजबूत की जा सकती

