Inflation : दुनिया के एक कोने में छिड़ा युद्ध जब सीमाओं को लांघकर आम आदमी की थाली तक पहुँच जाए, तो समझ लेना चाहिए कि संकट गहरा है। ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और हालिया सैन्य हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। विडंबना यह है कि कूटनीतिक गलियारों की चुप्पी का खामियाजा अब भारत के मध्यम और निम्न वर्ग को अपनी जेब ढीली करके भुगतना पड़ रहा है।
7 मार्च 2026 से प्रभावी हुई रसोई गैस की नई कीमतों ने आम जनता को जोर का झटका दिया है। आइए जानते हैं इस मूल्यवृद्धि के पीछे के समीकरण और इसके दूरगामी परिणाम।
महंगाई का तड़का: एलपीजी और कमर्शियल सिलेंडर के दाम में भारी उछाल
Inflation शनिवार सुबह से देश भर में रसोई गैस के दामों में जो आग लगी है, उसने गृहिणियों के बजट को बिगाड़ दिया है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में सीधे 60 रुपये की वृद्धि की गई है। यह वृद्धि पिछले एक साल (अप्रैल 2025) से स्थिर चल रही कीमतों के बाद एक बड़ा बदलाव है।
केवल घरेलू चूल्हा ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक क्षेत्र भी इसकी चपेट में है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 115 रुपये की भारी बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर रेस्तरां, ढाबों और छोटे खाद्य व्यवसायों पर पड़ेगा, जिससे बाहर खाना खाना और भी महंगा हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो बस शुरुआत है; यदि युद्ध लंबा खिंचा, तो कीमतें और भी ऊपर जा सकती हैं।
विदेशी निर्भरता और कूटनीति का पेच
Inflation भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 65% और सीएनजी का 50% हिस्सा विदेशों से आयात करता है। हमारी ऊर्जा सुरक्षा मुख्य रूप से सऊदी अरब, कतर, यूएई और रूस जैसे देशों पर टिकी है। ईरान के साथ मौजूदा तनाव और भारत की बदलती विदेश नीति ने आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बाधित कर दिया है।
आलोचकों का तर्क है कि भारत की वर्तमान विदेश नीति में ‘तटस्थता’ की कमी और वैश्विक शक्तियों के प्रति झुकाव ने हमें ईरान जैसे महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार से दूर कर दिया है। ईरान द्वारा आपूर्ति रोके जाने का अर्थ है कि हमें अन्य महंगे विकल्पों की ओर जाना होगा, जिसका बोझ सीधे तौर पर उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है। देश में 32 करोड़ रसोई गैस उपभोक्ता हैं और सालाना 180 करोड़ सिलेंडरों की खपत होती है। इस गणित के हिसाब से जनता पर लगभग 60 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ लाद दिया गया है।
सरकारी दावे बनाम जमीनी हकीकत
Inflation कुछ समय पूर्व केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश को आश्वस्त किया था कि ईंधन की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी और स्टॉक पर्याप्त है। परंतु, आज की मूल्यवृद्धि ने उन दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। सवाल यह उठता है कि यदि देश में ईंधन की कमी नहीं है, तो वैश्विक अस्थिरता का बहाना बनाकर कीमतें क्यों बढ़ाई जा रही हैं?
उज्ज्वला योजना के तहत दी जाने वाली 15 हजार करोड़ की सब्सिडी भी इस भारी महंगाई के आगे बौनी साबित हो रही है। आने वाले दिनों में यह संकट केवल गैस तक सीमित नहीं रहेगा; आशंका जताई जा रही है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी भारी उछाल आ सकता है, जिससे परिवहन महंगा होगा और अंततः हर चीज के दाम बढ़ेंगे। फिलहाल, जनता के पास ‘देशहित’ के नाम पर चुप रहने या इस महंगाई को अपनी नियति मान लेने के अलावा कोई विकल्प नजर नहीं आता।
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