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रिपोर्टर: मयंक गुप्ता

Gwalior : जिले में स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. एमएस सागर के खिलाफ श्री राजपूत करणी सेना ने कड़ा रुख अपनाते हुए मोर्चा खोल दिया है। करणी सेना ने सीएमएचओ पर प्रशासनिक मनमानी, कर्मचारियों पर अनुचित दबाव बनाने और तबादलों में पक्षपात करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले में संगठन ने जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर – पूर्व स्वास्थ्य कर्मी CMHO ऑफिस

तबादलों में पक्षपात और प्रसाद बांटने पर नौकरी से हटाने का आरोप

Gwalior करणी सेना की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि सीएमएचओ के कार्यकाल में ट्रांसफर और पोस्टिंग में बड़े पैमाने पर भेदभाव किया जा रहा है। ज्ञापन में एएनएम आकांक्षा जाटव और सहायक ग्रेड-3 अजय सक्सेना के तबादलों का विशेष उल्लेख करते हुए उनके आदेशों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इसके अलावा, सबसे सनसनीखेज आरोप पूर्व स्वास्थ्य कर्मी देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर को हटाने को लेकर है।

कुलदीप दुबे – तहसीलदार
श्याम सिंह राजावत -श्री राजपूत करणी सेना

पीड़ित का आरोप है कि वह सीएमएचओ कार्यालय स्थित हनुमान मंदिर में पिछले 5 साल से अधिक समय से पूजा कर रहा था, लेकिन हनुमान जी का प्रसाद खाने और उसे बांटने से नाराज होकर सीएमएचओ डॉ. एमएस सागर ने उसकी सेवाएं समाप्त कर दीं और एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठी एफआईआर दर्ज कराने की धमकी भी दी।

ग्रामीण डॉक्टरों की शहरी क्षेत्रों में तैनाती और वित्तीय अनियमितताओं की मांग

Gwalior संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग में चल रही कथित अनियमितताओं की परतें खोलने की मांग की है। करणी सेना ने सवाल उठाया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ कई डॉक्टर शहरी इलाकों में कैसे सेवाएं दे रहे हैं। इसके साथ ही, आयुष्मान भारत योजना और अस्पतालों के संचालन से जुड़ी वित्तीय गड़बड़ियों की भी उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग उठाई गई है, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका, उच्चस्तरीय जांच कमेटी की मांग

Gwalior ज्ञापन में 2 अप्रैल 2018 की जातिगत हिंसा का जिक्र करते हुए चिंता जताई गई है कि प्रशासनिक स्तर पर हो रहे इस तरह के भेदभावपूर्ण फैसलों से समाज का आपसी सौहार्द बिगड़ सकता है और कर्मचारियों के बीच तनाव बढ़ सकता है। करणी सेना ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन कड़ा कदम उठाने को मजबूर होगा। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच और सीएमएचओ पक्ष का इंतजार किया जा रहा है।

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