By: Ravindra Sikarwar
हरियाणा के फरीदाबाद जिले में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चांसलर और ट्रस्ट के प्रमुख पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर यह इल्ज़ाम है कि उन्होंने कई मृत हिंदू व्यक्तियों की जमीन को अपने नाम कराने के लिए फर्जी वारिस प्रमाण-पत्र, फर्जी वसीयतें और जाली हस्ताक्षरों का सहारा लिया। पुलिस ने चांसलर सैयद मोहम्मद हाशिम रिज़वी और उनके करीबियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और SC/ST एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि फरीदाबाद के धौज, सौनपुरा और आसपास के गांवों में सैकड़ों बीघा जमीन कई दशकों से स्थानीय हिंदू परिवारों के नाम थी। इनमें से अधिकांश मालिक या तो निःसंतान थे या वर्षों पहले गुजर चुके थे। इन जमीनों पर कोई कानूनी वारिस नहीं होने के कारण ये राजस्व रिकॉर्ड में “बिला-वारिस” या “मृतक आश्रित” श्रेणी में दर्ज थीं।
आरोप है कि अल-फलाह ट्रस्ट ने वर्ष 2016 से 2022 के बीच इन मृत व्यक्तियों के नाम पर फर्जी “लीगल हेयर सर्टिफिकेट” (कानूनी वारिस प्रमाण-पत्र) तैयार करवाए। इन फर्जी प्रमाण-पत्रों में कुछ व्यक्तियों को मृतक का भाई, भतीजा या दूर का रिश्तेदार दिखाया गया, जबकि असल में वे लोग या तो कभी अस्तित्व में थे ही नहीं या उनका उन मृतकों से कोई रक्त-संबंध नहीं था। इन फर्जी वारिसों ने तहसील और रजिस्ट्री कार्यालय में हल्फिया बयान देकर पूरी जमीन अल-फलाह ट्रस्ट को दान या बिक्री के नाम पर हस्तांतरित कर दी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई मामलों में मृतक की मौत को 40-50 साल पहले हो चुकी थी, लेकिन अचानक 2018-19 में उनके “जीवित वारिस” सामने आ गए और एक ही दिन में रजिस्ट्री करा दी गई। कुछ मृतकों की उम्र रिकॉर्ड में 110-120 साल दिखाई गई, फिर भी उनके “वारिस” ने दावा किया कि वे उनके जीवित भाई या पुत्र हैं।
शिकायतकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट विशंभर दयाल शर्मा ने बताया कि जब स्थानीय ग्रामीणों को इस फर्जीवाड़े का पता चला तो उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड की जांच की। जांच में सामने आया कि कई फर्जी वारिसों के आधार कार्ड, वोटर कार्ड और फोटो भी फर्जी थे। कुछ आधार कार्ड तो एक ही फोटो लगाकर अलग-अलग नामों से बनवाए गए थे। कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति ने अलग-अलग मृतकों का “भाई” बनकर दर्जनों रजिस्ट्रियां कराईं।
हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य कर्नल सरदार ताराचंद चहल ने भी इस मामले में पुलिस महानिदेशक को शिकायत दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट ने न केवल हिंदुओं की जमीन हड़पी, बल्कि कई दलित और पिछड़े परिवारों की पैतृक जमीन भी फर्जी दस्तावेजों के जरिए हथिया ली। इसलिए SC/ST एक्ट भी लगाया गया है।
पुलिस ने प्राथमिक जांच में पाया कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी के विस्तार के लिए यही जमीन इस्तेमाल की जा रही है। कुछ हिस्सों पर पहले से ही विश्वविद्यालय की बाउंड्रीवॉल खड़ी कर दी गई है और निर्माण कार्य चल रहा है। फरीदाबाद के एसएचओ सेंट्रल ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जल्द ही आरोपी चांसलर और ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया जाएगा। दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच और राजस्व रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की जा रही है।
वहीं अल-फलाह ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट इसे “राजनीतिक साजिश” बता रहा है। ट्रस्ट का दावा है कि सारी जमीन कानूनी तरीके से खरीदी या दान में मिली है।
इस पूरे प्रकरण ने फरीदाबाद में हिंदू-संगठनों में भारी रोष पैदा कर दिया है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने चेतावनी दी है कि अगर दोषियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। दूसरी ओर दलित संगठन भी सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। कुछ विपक्षी नेता इसे “लव जिहाद के बाद अब लैंड जिहाद” का नाम दे रहे हैं, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने कहा है कि कानून अपना काम करेगा और दोषी किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
कुल मिलाकर फरीदाबाद की यह घटना एक बार फिर भूमि हड़पने के नए और संगठित तरीकों को उजागर करती है। अगर आरोप सिद्ध हो गए तो यह हरियाणा के इतिहास में सबसे बड़े भूमि घोटालों में से एक माना जाएगा। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं।
