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रिपोर्टर: रतन कुमार

Mihijam : झारखंड के जामताड़ा जिले के अंतर्गत आने वाले मिहिजाम नगर परिषद क्षेत्र में दो नए सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के लिए जारी की गई निविदा (टेंडर) प्रक्रिया गंभीर विवादों में घिर गई है। टेंडर में निर्माण स्थल के चयन और उसके सत्यापन से जुड़ी शर्तों को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस पूरे मामले को लेकर जनसेवा पार्टी के संयोजक राकेश लाल ने नगर परिषद की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाते हुए वर्तमान निविदा प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और पूरी पारदर्शिता के साथ नए सिरे से टेंडर जारी करने की मांग की है।

निविदा प्रक्रिया और स्थल चयन की अनिश्चितता पर सवाल

Mihijam नगर परिषद कार्यालय द्वारा 26 अक्टूबर को एनआईटी संख्या 06/2026-27 के तहत लगभग 28.11 लाख रुपये की लागत से दो 9-सीटर सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इनमें से एक शौचालय का निर्माण हटिया परिसर में प्रस्तावित है, जबकि दूसरे शौचालय के लिए किसी भी विशिष्ट स्थल का उल्लेख नहीं किया गया है। विवाद तब गहराया जब नगर परिषद ने संशोधन सूचना जारी कर संवेदकों से ‘साइट वेरिफिकेशन रिपोर्ट’ की मांग की, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि निर्माण स्थल का वास्तविक चयन करने की जिम्मेदारी किसकी है।

संवेदकों पर थोपी गई सत्यापन की शर्त और प्रशासनिक पत्राचार

Mihijam निविदा संशोधन के बाद जब एक कंस्ट्रक्शन कंपनी ने स्थल सत्यापन रिपोर्ट मांगी, तो नगर परिषद ने कंपनी से जियोटैग फोटो उपलब्ध कराने और लिखित रूप से संतुष्टि जताने को कहा। इस अजीबोगरीब प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए राकेश लाल ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि यदि स्थल का चयन और सत्यापन नगर परिषद के अधिकृत इंजीनियरों का काम है, तो इसके लिए टेंडर भरने वाले संवेदकों को क्यों जिम्मेदार ठहराया जा रहा है और टेंडर प्रकाशन से पहले स्थलों का चयन क्यों नहीं किया गया।

पुराने शौचालयों की जर्जर हालत और रखरखाव पर गंभीर चिंता

Mihijam विवादित निविदा के अलावा नगर परिषद क्षेत्र में पहले से बने शौचालयों की उपयोगिता पर भी सवाल उठाए गए हैं। विभिन्न वार्डों में पूर्व में लाखों रुपये खर्च कर आधा दर्जन से अधिक सामुदायिक शौचालय बनाए गए थे, लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में वे आज बदहाल और जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि नए निर्माण पर राशि खर्च करने से पहले पुराने और बेकार पड़े शौचालयों को दुरुस्त कर जनता के उपयोग के योग्य बनाया जाना चाहिए।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया और प्रशासन का अगला कदम

Mihijam इस पूरे मामले में जब नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन पर कुछ भी कहने से इनकार करते हुए कार्यालय आकर मिलने की बात कही। वहीं, इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी ने बताया कि उन्हें इस गड़बड़ी की शिकायत मिल चुकी है और कार्यपालक पदाधिकारी से बात कर पूरी रिपोर्ट तलब की जा रही है। जरूरत पड़ने पर इस पूरे मामले से जिले के उपायुक्त (DC) को भी अवगत कराया जाएगा ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।

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