रिपोर्टर: रंजीत सिंह
MP Excise Scandal : मध्य प्रदेश का आबकारी विभाग इन दिनों गंभीर घोटालों, जहरीली शराब कांडों और शराब माफियाओं के बढ़ते दुस्साहस के कारण निरंतर विवादों के केंद्र में बना हुआ है। हाल ही में देवास और सागर जिलों में हुए जहरीली शराब हादसों के बाद अवैध कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंचे पुलिस अधिकारी (टीआई) को ट्रक से रौंदने जैसी दुस्साहसिक घटनाओं ने राज्य के पूरे प्रशासनिक ढांचे और आबकारी प्रणाली पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों की कार्रवाई से यह बात बार-बार उजागर हो रही है कि विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों और अवैध शराब तस्करों के बीच गहरा सांठगांठ रहा है।
शीर्ष स्तर के अधिकारी और भ्रष्टाचार के गंभीर मामले
MP Excise Scandal आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार के मामले किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें उच्च पदों पर आसीन अधिकारी भी लिप्त पाए गए हैं। उपमुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री के पूर्व ओएसडी तथा सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचुरा के खिलाफ लोकायुक्त ने फर्जी एफडी (FD) घोटाले से जुड़ी भ्रष्टाचार की धाराओं में मामला दर्ज किया था, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। इसी तरह जबलपुर में पदस्थ सहायक आयुक्त संजीव दुबे पर वर्ष 2015 के चर्चित 72 करोड़ रुपये के इंदौर आबकारी घोटाले में संलिप्तता के गंभीर आरोप हैं, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भी की जा रही है।
महिला अधिकारियों पर रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग के आरोप
MP Excise Scandal विभाग में पदस्थ महिला अधिकारी भी इन विवादों से अछूती नहीं रही हैं। देवास की तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित पर एक शराब ठेकेदार से हर महीने प्रति दुकान मोटी रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद ठेकेदार की सुसाइड की घटना ने काफी तूल पकड़ा था। इसके अतिरिक्त, उमरिया जिले की तत्कालीन आबकारी अधिकारी रीनी गुप्ता को रीवा लोकायुक्त की टीम ने कलेक्ट्रेट स्थित उनके कार्यालय से ही 1 लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
लोकायुक्त छापों में 100 करोड़ से अधिक की अकूत संपत्तियों का खुलासा
MP Excise Scandal आबकारी विभाग के कई पूर्व व वर्तमान अधिकारियों के परिसरों पर लोकायुक्त द्वारा की गई छापेमारी में बेहिसाब काले धन और करोड़ों की संपत्तियों का खुलासा हुआ है। इंदौर के पूर्व सहायक आबकारी आयुक्त आलोक खरे के ठिकानों पर हुई कार्रवाई में 100 करोड़ रुपये से अधिक की आय से अधिक संपत्ति का पता चला था। वहीं सेवानिवृत्त अधिकारी धर्मेंद्र भदौरिया के ठिकानों पर मारे गए छापों में 10 करोड़ से अधिक का सोना और लगभग 35 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति पाई गई थी। इसके अलावा, पराक्रम चंद्रावत जैसे अधिकारियों के खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति के मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है।
मध्य प्रदेश की आबकारी नीति और गुजरात सीमा पर तस्करी का खेल
MP Excise Scandal मध्य प्रदेश में लगभग 3,500 शराब दुकानों के ठेके सालाना लगभग 20,000 करोड़ रुपये में दिए जाते हैं। अत्यधिक महंगे ठेके और राज्य में शराब की ऊंची कीमतों के कारण ठेकेदार अधिक मुनाफा कमाने के लिए अवैध रास्तों का सहारा लेते हैं। गुजरात जैसे शुष्क (ड्राई) राज्य की सीमाओं से सटे जिलों में शराब की दुकानों के ऊंचे दाम चुकाए जाते हैं ताकि वहां से बड़े पैमाने पर अवैध शराब की तस्करी गुजरात में की जा सके। इसी तस्करी और सांठगांठ के चलते देवास जैसी दुखद घटनाएं सामने आ रही हैं, जिसके बाद प्रशासन ने रासुका (NSA) और जिलाबदर जैसी दंडात्मक कार्रवाइयों की चेतावनी दी है।
ये भी पढे: मुरैना में पुलिस एनकाउंटर: 80 हजार का इनामी कल्ली गुर्जर गिरफ्तार, पैर में लगी गोली

