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रिपोर्टर: अतहर खान

Munger : जब बात दुनिया के सबसे प्राचीन और विशालकाय पेड़ों की आती है, तो अमूमन लोगों का ध्यान विदेशी जंगलों की तरफ जाता है। लेकिन आपको यह जानकर गर्व होगा कि दुनिया का सबसे पुराना बरगद का पेड़ भारत के बिहार राज्य में स्थित है। मुंगेर जिले के आईटीसी (ITC) परिसर में शान से खड़े इस ऐतिहासिक वटवृक्ष की उम्र 700 साल से भी अधिक पाई गई है। तीन वर्षों तक चली गहन वैज्ञानिक रिसर्च और आधुनिक कार्बन डेटिंग तकनीक के बाद इस अद्भुत रहस्य से आधिकारिक रूप से पर्दा उठ गया है।

Munger लखनऊ के वैज्ञानिकों ने 3 साल की रिसर्च के बाद सुलझाई पहेली

साल 2022 में बिहार वन विभाग ने इस विशालकाय पेड़ की वास्तविक आयु का पता लगाने का बीड़ा उठाया था। यह जिम्मेदारी लखनऊ के मशहूर ‘बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान’ (BSIP) की वैज्ञानिक डॉ. त्रिणा बोस और रिसर्च स्कॉलर अवनीश मिश्रा को सौंपी गई। बरगद के पेड़ की उम्र मापना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इसमें अन्य पेड़ों की तरह सालाना छल्ले (Annual Rings) नहीं बनते। वैज्ञानिकों ने पेड़ को सुरक्षित रखते हुए उसकी सूखी जटाओं और मुख्य तने के नमूनों को इकट्ठा किया और तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद इसके इतिहास को डिकोड किया।

Munger मुगल सल्तनत से लेकर आधुनिक भारत का जीवित गवाह

कार्बन डेटिंग की रिपोर्ट ने वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल दिया, जब यह साबित हुआ कि यह पेड़ 7 सदी यानी 700 वर्षों से भी अधिक पुराना है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस बरगद ने भारत में मुगलों का आगमन, सल्तनत काल, अंग्रेजों की गुलामी और देश की आजादी का पूरा सफर देखा है। यह पेड़ सिर्फ एक वनस्पति नहीं, बल्कि इतिहास का एक जीता-जागता दस्तावेज है। वैज्ञानिकों का यह भी अनुमान है कि इस पेड़ की वास्तविक उम्र इससे भी कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि अभी इसके केवल एक हिस्से के सैंपल्स की ही जांच की गई है।

Munger स्थानीय लोगों की आस्था पर लगी विज्ञान की मुहर

मुंगेर के स्थानीय निवासियों के लिए यह वटवृक्ष हमेशा से गहरी आस्था और कौतूहल का विषय रहा है। इलाके के बुजुर्ग अक्सर कहा करते थे कि उनकी कई पीढ़ियों ने इस पेड़ के आकार और भव्यता को ऐसे ही देखा है। पीढ़ियों से चले आ रहे इस पारंपरिक दावे पर अब विज्ञान ने भी अपनी मुहर लगा दी है। अपनी चारों तरफ फैली विशाल शाखाओं और लंबी-लंबी जटाओं के साथ यह बरगद अब न सिर्फ बिहार बल्कि पूरी दुनिया की प्राकृतिक धरोहर बन चुका है, जिसे देखने के लिए आने वाले समय में पर्यटकों और पर्यावरणविदों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।

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