SrinagarSrinagar
Spread the love

रिपोर्टर: अरमान कुरेशी

Srinagar : जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर स्थित ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर में बुधवार को ‘अमरनाथ छड़ी मुबारक’ की पूजा पारंपरिक रीति-रिवाजों और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुई। इस पवित्र अनुष्ठान में महंत दीपेंद्र गिरि सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए साधु-संतों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

Srinagar अमरनाथ यात्रा की प्राचीन परंपरा और धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ यात्रा का औपचारिक और पूर्ण स्वरूप ‘छड़ी मुबारक’ के पूजन से ही जुड़ा हुआ है। सदियों पुरानी परंपरा के तहत पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर प्रस्थान करने से पूर्व छड़ी मुबारक को कश्मीर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर ले जाकर पूजा-अर्चना की जाती है। श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से आरंभ होकर यह यात्रा विभिन्न मंदिरों से गुजरती है और अंत में अमरनाथ गुफा पहुंचकर संपन्न होती है।

Srinagar 22 अगस्त से शुरू होगा पवित्र छड़ी का अमरनाथ प्रस्थान

शंकराचार्य मंदिर में पूजा के उपरांत परंपरा के अनुसार शारिका देवी मंदिर में अनुष्ठान किया जाएगा। इसके बाद 22 अगस्त को छड़ी मुबारक श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से पहलगाम के लिए प्रस्थान करेगी। 22 और 23 अगस्त को पहलगाम में लिद्दर नदी के तट पर विशेष पूजा आयोजित होगी, जिसके बाद यात्रा चंदनवाड़ी (24 अगस्त), शेषनाग (25 अगस्त) और पंचतरणी (26-27 अगस्त) होते हुए 28 अगस्त को पवित्र अमरनाथ गुफा पहुंचेगी।

खराब मौसम के बावजूद जारी रहेगी सदियों पुरानी परंपरा

उल्लेखनीय है कि 3 जुलाई से शुरू हुई 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा के दौरान इस वर्ष 4.67 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। 8 अगस्त से लगातार हो रही बारिश और ट्रैक की मरम्मत के कारण आम यात्रियों के लिए यात्रा स्थगित कर दी गई है। इसके बावजूद, परंपरा का निर्वहन करते हुए छड़ी मुबारक को निर्धारित तिथि पर ही पवित्र गुफा तक ले जाया जाएगा, जहां अंतिम अनुष्ठान के साथ वार्षिक यात्रा का औपचारिक समापन होगा।

ये भी पढ़े: जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ तीनों आरोप साबित, दिल्ली स्थित आवास से मिली थी भारी मात्रा में नकदी