रिपोर्टर: अरविन्द सिंह
AIIMS Bhopal : राजधानी भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में उस वक्त हड़कंप मच गया जब करीब 260 आउटसोर्स कर्मचारियों को अचानक सेवा से हटाने और स्थानांतरित करने का फरमान जारी कर दिया गया। हाउसकीपिंग और वार्ड बॉय समेत विभिन्न विभागों में कार्यरत इन कर्मचारियों को जैसे ही इस फैसले की भनक लगी, उनमें भारी रोष व्याप्त हो गया। गुरुवार सुबह सैकड़ों कर्मचारियों ने एम्स के मुख्य प्रवेश द्वार पर एकत्र होकर उग्र प्रदर्शन और धरना शुरू कर दिया। हालांकि, लगभग तीन घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के सामने अंततः प्रबंधन को झुकना पड़ा और बर्खास्तगी व तबादले के आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया।
रात के अंधेरे में थमाया गया फरमान, कारण बताए बिना नौकरी समाप्त करने का आरोप
AIIMS Bhopal पीड़ित कर्मचारियों के अनुसार, बुधवार रात लगभग 9:00 से 9:30 बजे के मध्य आउटसोर्सिंग एजेंसी (एमजी सोलंकी) के माध्यम से काम कर रहे 260 कर्मचारियों की एक सूची जारी की गई। इस सूची में शामिल कई कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं, जबकि कुछ का अचानक स्थानांतरण कर दिया गया था। किसी भी कर्मचारी को हटाने या ट्रांसफर करने का कोई स्पष्ट कारण नहीं दर्शाया गया था। रातभर प्रबंधन से संपर्क साधने की निष्फल कोशिशों के बाद सुबह से ही कर्मचारियों का आक्रोश सड़कों पर आ गया।
मुख्य द्वार पर 3 घंटे चला जोरदार धरना-प्रदर्शन, गूंजे री-अपॉइंटमेंट के नारे
AIIMS Bhopal रोजगार छीन जाने के विरोध में कर्मचारियों ने एम्स के मुख्य द्वार को घेरकर प्रशासनिक रवैये के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब तीन घंटे तक चले इस धरने के कारण एम्स परिसर में अफरा-तफरी और तनाव की स्थिति बनी रही। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना था कि बिना किसी पूर्व सूचना या कारण बताओ नोटिस के अचानक निकाला जाना उनके और उनके परिवारों के जीवन यापन पर सीधा हमला है, जिसे वे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।
चौतरफा दबाव के बाद प्रबंधन ने आदेश निरस्त किया, कर्मचारियों ने समाप्त किया आंदोलन
AIIMS Bhopal कर्मचारियों की एकजुटता और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए एम्स प्रबंधन को बैकफुट पर आना पड़ा। प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से पूर्व में जारी सेवा समाप्ति तथा स्थानांतरण संबंधी आदेश को रद्द करते हुए सभी 260 आउटसोर्स कर्मचारियों की कार्य पर बहाली का नया आदेश जारी किया। लिखित में बहाली का पत्र मिलते ही कर्मचारियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया और काम पर लौट आए। हालांकि, प्रारंभिक स्तर पर यह तुगलकी फरमान किस आधार पर जारी किया गया था, इसे लेकर प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

