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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने 28 अक्टूबर 2025 को 8वीं केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) के लिए संदर्भ शर्तों (टीओआर) को औपचारिक मंजूरी प्रदान की। यह निर्णय केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पूर्व कर्मचारियों (पेंशनभोगियों) के वेतन संरचना, भत्तों तथा पेंशन योजनाओं में व्यापक बदलाव का आधार बनेगा। जनवरी 2025 में आयोग गठन की घोषणा के करीब 10 महीने बाद यह कदम उठाया गया, जो सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत है। आयोग को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, जिसके बाद वेतन वृद्धि की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी।

आयोग का गठन: जनवरी 2025 से शुरू हुई प्रक्रिया
केंद्र सरकार ने 2025 के प्रारंभ में ही 8वीं वेतन आयोग के गठन का निर्णय लिया था, जो 7वीं वेतन आयोग (2016 में लागू) के 10 वर्ष पूरे होने के बाद अपेक्षित था। वित्त मंत्रालय के तहत संचालित यह आयोग कर्मचारियों के वेतनमान, महंगाई भत्ता (डीए), घर किराया भत्ता (एचआरए) तथा अन्य सुविधाओं की समीक्षा करेगा। केंद्रीय संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “जनवरी में सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद अब आयोग औपचारिक रूप से गठित हो गया है।” आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा, और यह विभिन्न हितधारकों से परामर्श के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा।

टीओआर का महत्व: क्या है संदर्भ शर्तें?
टीओआर (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) आयोग के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज है, जो इसकी कार्यप्रणाली, दायरे और सिफारिशों के पैरामीटर को परिभाषित करता है। यह संयुक्त परामर्शी मशीनरी (जेसीएम) द्वारा तैयार किया जाता है, जिसकी अंतिम स्वीकृति वित्त मंत्रालय के कैबिनेट समिति से ली जाती है। 8वीं वेतन आयोग के टीओआर में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु शामिल हैं:

  1. वेतन संरचना की समीक्षा: केंद्रीय कर्मचारियों के मौजूदा वेतनमान, ग्रेड पे तथा पदोन्नति आधारित वृद्धि की जांच।
  2. भत्तों का मूल्यांकन: महंगाई भत्ता (डीए), यात्रा भत्ता (टीए), चिकित्सा सुविधाएं (सीजीएचएस) और अन्य मासिक भत्तों में संशोधन।
  3. पेंशन योजनाओं का विश्लेषण: गैर-योगदान वाली पेंशन योजनाओं के वित्तीय प्रभाव की जांच, विशेषकर 2004 से पूर्व नियुक्त कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) में संक्रमण।
  4. कार्य स्थितियां और लाभ: केंद्रीय लोक उद्यमों (सीपीएसयू) तथा निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की तुलना, ताकि भारतीय संदर्भ में अनुकूलन सुनिश्चित हो।
  5. वित्तीय निहितार्थ: गैर-फंडेड पेंशन दायित्वों का अनुमान लगाना, क्योंकि वर्तमान में इनके लिए कोई बजटीय प्रावधान नहीं है।
टीओआर के प्रमुख घटकविवरण
वेतनमान समीक्षाग्रेड पे, बेसिक पे और पदोन्नति वृद्धि
भत्ता संशोधनडीए, एचआरए, टीए और चिकित्सा लाभ
पेंशन प्रभावएनपीएस से यूपीएस संक्रमण का वित्तीय बोझ
तुलनात्मक अध्ययनसीपीएसयू और निजी क्षेत्र की सुविधाएं
समय सीमागठन की तिथि से 18 माह में रिपोर्ट

सरकार ने 7वीं वेतन आयोग के टीओआर से “वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन” वाला प्रावधान हटा दिया है, लेकिन पेंशन योजनाओं पर नया जोर दिया गया है।

आयोग की संरचना: प्रमुख सदस्य और भूमिकाएं
कैबिनेट ने आयोग की संरचना को भी अंतिम रूप दिया है। यह तीन सदस्यीय निकाय होगा:

  • अध्यक्ष: जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई, पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज और वर्तमान में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की अध्यक्ष। उनकी न्यायिक अनुभव से आयोग को निष्पक्षता मिलेगी।
  • अंशकालिक सदस्य: प्रोफेसर पुलक घोष, आईआईएम बैंगलोर के प्रोफेसर। अर्थशास्त्र और वित्तीय मॉडलिंग में विशेषज्ञता के कारण उन्हें चुना गया।
  • सदस्य-सचिव: पंकज जैन, पेट्रोलियम सचिव। प्रशासनिक कुशलता से आयोग के कार्यान्वयन में सहायता।

आयोग को हितधारकों जैसे कर्मचारी संघों, विभागाध्यक्षों और विशेषज्ञों से सुझाव लेने का अधिकार होगा। रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि गठन की तारीख से 18 माह बाद होगी, यानी अप्रैल 2027 तक।

प्रभाव: कितने लाभान्वित होंगे और कब लागू होगा?
यह आयोग 50 लाख सक्रिय केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों को प्रभावित करेगा। सिफारिशें लागू होने पर औसतन 20-30% वेतन वृद्धि संभव है, जो 7वीं वेतन आयोग की तरह होगी। पिछले आयोगों की तरह, यह बदलाव 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो सकता है, लेकिन विलंब की स्थिति में 2027 तक खिसक सकता है। कर्मचारी संगठनों ने स्वागत किया है, लेकिन पेंशन स्पष्टता पर जोर दिया।

लाभार्थी वर्गसंख्याप्रभाव
सक्रिय कर्मचारी50 लाखवेतन, भत्ता वृद्धि
पेंशनभोगी65 लाखपेंशन संशोधन
कुल1.15 करोड़कुल प्रभाव

पृष्ठभूमि: वेतन आयोगों का इतिहास
वेतन आयोग भारत में हर 10 वर्ष में गठित होते हैं। 7वीं वेतन आयोग ने 2016 में 14% औसत वृद्धि की सिफारिश की, जो 2021 तक डीए समायोजन से पूरी हुई। 8वीं आयोग महंगाई, मुद्रास्फीति और जीवनयापन लागत को ध्यान में रखेगा।

अगले कदम: रिपोर्ट और कार्यान्वयन
आयोग अब टीओआर के आधार पर कार्य शुरू करेगा। सिफारिशें कैबिनेट के समक्ष रखी जाएंगी, जहां वित्तीय प्रभाव का मूल्यांकन होगा। कर्मचारी संघों ने आयोग से शीघ्र रिपोर्ट की मांग की है। यह निर्णय सरकारी कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाएगा और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा। अधिक जानकारी के लिए वित्त मंत्रालय की वेबसाइट देखें।