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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ओपनएआई ने 21 अक्टूबर 2025 को अपना नया वेब ब्राउजर ‘चैटजीपीटी एटलस’ लॉन्च किया है, जो गूगल क्रोम के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा में उतरा है। यह ब्राउजर चैटजीपीटी को अपने मूल में समाहित करता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को वेब ब्राउजिंग के दौरान एआई की मदद से कार्यों को आसान बनाने की सुविधा मिलती है। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने इसे एक दशक में एक बार आने वाला अवसर बताया, जहां ब्राउजर को नए सिरे से डिजाइन कर उपयोगकर्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। कंपनी का लक्ष्य पारंपरिक सर्च बार को चैटबॉट इंटरफेस से बदलना है, जो भविष्य में इंटरनेट उपयोग का मुख्य माध्यम बन सकता है।

एटलस ब्राउजर की मुख्य विशेषताएं: यह ब्राउजर चैटजीपीटी को ब्राउजर विंडो में ही एकीकृत करता है, जहां उपयोगकर्ता किसी भी पेज पर साइडबार खोलकर सामग्री का सारांश निकाल सकते हैं, उत्पादों की तुलना कर सकते हैं या डेटा का विश्लेषण करवा सकते हैं। एक महत्वपूर्ण फीचर ‘ब्राउजर मेमोरीज’ है, जो वैकल्पिक रूप से सक्रिय किया जा सकता है और चैटजीपीटी को विजिट की गई साइटों से संदर्भ याद रखने की अनुमति देता है। उदाहरण के लिए, यह पिछले सप्ताह की जॉब पोस्टिंग्स का सारांश दे सकता है या इंटरव्यू के लिए इंडस्ट्री ट्रेंड्स की रिपोर्ट तैयार कर सकता है। उपयोगकर्ता सेटिंग्स से इन मेमोरीज को देख, आर्काइव या डिलीट कर सकते हैं, और ब्राउजिंग हिस्ट्री डिलीट करने पर संबंधित मेमोरीज भी हट जाती हैं।

एक और प्रमुख फीचर ‘एजेंट मोड’ है, जो प्लस, प्रो और बिजनेस यूजर्स के लिए उपलब्ध है। यह मोड चैटजीपीटी को स्वतंत्र रूप से कार्य करने की क्षमता देता है, जैसे रिसर्च करना, रूटीन ऑटोमेट करना, इवेंट प्लान करना या अपॉइंटमेंट बुक करना। एक डेमो में दिखाया गया कि चैटजीपीटी एक रेसिपी ढूंढता है और फिर इंस्टाकार्ट पर सामग्री को कार्ट में जोड़कर ऑर्डर पूरा करता है। यह मोड ब्राउजर में तेजी से काम करता है, लेकिन अभी प्रिव्यू में है और जटिल कार्यों में त्रुटियां हो सकती हैं। सुरक्षा के लिए, यह कोड एक्जीक्यूट नहीं करता, फाइल डाउनलोड नहीं करता और संवेदनशील साइटों पर रुक जाता है।

न्यू टैब पेज को एक सर्च बार के रूप में डिजाइन किया गया है, जहां उपयोगकर्ता सवाल पूछ सकते हैं या यूआरएल एंटर कर सकते हैं। यह ऑटोकंपलीट सुझाव देता है और सर्च लिंक्स, इमेजेस, वीडियोज तथा न्यूज के लिए अलग टैब प्रदान करता है। ब्राउजर में इंकॉग्निटो मोड भी है, जहां चैटजीपीटी से लॉगआउट होकर ब्राउजिंग की जा सकती है और कोई डेटा सेव नहीं होता। प्राइवेसी कंट्रोल्स मजबूत हैं, जहां उपयोगकर्ता विशिष्ट पेज या पूरी हिस्ट्री क्लियर कर सकते हैं। डिफॉल्ट रूप से, ब्राउज्ड कंटेंट मॉडल ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल नहीं होता, लेकिन सेटिंग्स से ऑप्ट-इन किया जा सकता है।

उपलब्धता और सिस्टम रिक्वायरमेंट्स: एटलस ब्राउजर की शुरुआत मैकओएस पर वैश्विक स्तर पर की गई है, जो फ्री, प्लस, प्रो और गो यूजर्स के लिए उपलब्ध है। बिजनेस यूजर्स के लिए यह बीटा में है, जबकि एंटरप्राइज और एडु यूजर्स के लिए प्लान एडमिनिस्ट्रेटर द्वारा सक्रिय किया जा सकता है। जल्द ही विंडोज, आईओएस और एंड्रॉइड वर्जन लाए जाएंगे। डाउनलोड https://chatgpt.com/atlas से किया जा सकता है, जहां उपयोगकर्ता अपने मौजूदा ब्राउजर से बुकमार्क्स, पासवर्ड और हिस्ट्री इंपोर्ट कर सकते हैं।

गूगल के साथ प्रतिस्पर्धा: यह लॉन्च ओपनएआई की गूगल के खिलाफ रणनीति का हिस्सा है, जहां कंपनी चैटजीपीटी के 80 करोड़ साप्ताहिक यूजर्स का फायदा उठाकर ब्राउजर व्यवहार पर डेटा एकत्र कर रही है। गूगल क्रोम का वैश्विक मार्केट शेयर 71.9 प्रतिशत है, और एटलस के आने से अल्फाबेट के शेयरों में 1.8 प्रतिशत की गिरावट आई। ओपनएआई एडवर्टाइजिंग में प्रवेश कर सकती है, जो गूगल के 90 प्रतिशत सर्च एड शेयर को चुनौती दे सकता है। ब्राउजर वार्स के तीसरे चरण में, जहां पहले इंटरनेट एक्सप्लोरर ने नेटस्केप को हराया और फिर क्रोम ने इंटरनेट एक्सप्लोरर को, एटलस एक नया मोड़ ला सकता है। ओपनएआई ने हाल के एंटीट्रस्ट केस में क्रोम खरीदने में रुचि दिखाई थी, हालांकि अदालत ने गूगल को ब्राउजर बेचने का आदेश नहीं दिया।

विश्लेषकों की राय और चुनौतियां: फॉरेस्टर के विश्लेषक पैडी हैरिंगटन ने क्रोम की ‘विशाल मार्केट शेयर’ के खिलाफ चुनौती को बड़ा बताया, साथ ही एजेंट मोड में उपयोगकर्ता इंटेंट की सटीकता और डेटा से प्रभावित पूर्वाग्रहों पर चिंता जताई। ओपनएआई को इंफ्रास्ट्रक्चर में गूगल से पीछे होने की समस्या है, लेकिन एनविडिया से 100 अरब डॉलर का निवेश और खुद के एआई चिप्स डिजाइन करने से मजबूती मिल रही है। एटलस एआई ब्राउजर्स जैसे पर्प्लेक्सिटी के कॉमेट, ब्रेव और ओपेरा के नियॉन से भी मुकाबला करेगा। भविष्य में मल्टी-प्रोफाइल सपोर्ट, बेहतर डेवलपर टूल्स और ऐप्स एसडीके के लिए डिस्कवरेबिलिटी बढ़ाने की योजनाएं हैं।

यह लॉन्च एआई को दैनिक ऑनलाइन गतिविधियों में गहराई से जोड़ने की दिशा में एक कदम है, लेकिन प्राइवेसी, एआई की त्रुटियां (जैसे हेलुसिनेशन) और कॉपीराइट मुद्दों पर बहस छिड़ सकती है। ओपनएआई का मानना है कि एजेंटिक सिस्टम्स से रूटीन कार्यों को डेलिगेट किया जा सकेगा, जो इंटरनेट उपयोग को बदल देगा।

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