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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: भारत के भ्रष्टाचार निरोधक संस्थान लोकपाल ने सात हाई-एंड बीएमडब्ल्यू कारों की खरीद के लिए टेंडर जारी किया है, जिसकी कुल लागत लगभग 5 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। यह कदम विपक्षी दलों और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं की तीखी आलोचना का शिकार हो रहा है, जो इसे संस्थान की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए देख रहे हैं। लोकपाल, जो सार्वजनिक पदाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच के लिए स्थापित किया गया था, वर्तमान में सात सदस्यों वाला है, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर (सेवानिवृत्त) और छह अन्य सदस्य शामिल हैं। इस खरीद का उद्देश्य प्रत्येक सदस्य को एक वाहन उपलब्ध कराना है।

टेंडर की विस्तृत जानकारी के अनुसार, यह निविदा 16 अक्टूबर 2025 को जारी की गई थी, जिसमें प्रतिष्ठित एजेंसियों से सात बीएमडब्ल्यू 3 सीरीज 330Li ‘एम स्पोर्ट’ मॉडल की आपूर्ति के लिए बोलियां आमंत्रित की गई हैं। ये कारें लॉन्ग व्हीलबेस वाली हैं और सफेद रंग में होनी चाहिएं। यह मॉडल अपने सेगमेंट में सबसे लंबी और विशाल कार के रूप में जाना जाता है, जिसमें बेहद लग्जरी केबिन, उत्कृष्ट आराम, प्रभावशाली शक्ति और उन्नत तकनीक शामिल है। निविदा में 10 लाख रुपये की अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी) जमा करने की आवश्यकता है, और बोलियां जमा करने की अंतिम तिथि 6 नवंबर 2025 है। बोलियां 7 नवंबर 2025 को दोपहर 4 बजे से खोली जाएंगी।

कारों की कीमत और कुल खर्च: प्रत्येक बीएमडब्ल्यू 330Li की दिल्ली में ऑन-रोड कीमत लगभग 69.5 से 70 लाख रुपये है, जैसा कि निर्माता की वेबसाइट पर उल्लेखित है। सात कारों के लिए कुल अनुमानित लागत 4.9 से 5 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। लोकपाल ने स्पष्ट किया है कि वाहनों की डिलीवरी सप्लाई ऑर्डर की तिथि से अधिमानतः दो सप्ताह के भीतर होनी चाहिए, लेकिन 30 दिनों से अधिक नहीं। डिलीवरी लोकपाल के दिल्ली के वसंत कुंज संस्थागत क्षेत्र स्थित कार्यालय में होगी।

ट्रेनिंग की आवश्यकताएं: चयनित विक्रेता को लोकपाल के नामित ड्राइवरों और स्टाफ के लिए कम से कम सात दिनों का व्यापक व्यावहारिक और सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान करना होगा, जो वाहनों की डिलीवरी के 15 दिनों के भीतर पूरा होना चाहिए। इस प्रशिक्षण में सभी नियंत्रणों, सुविधाओं और सुरक्षा प्रणालियों से परिचय, आपातकालीन हैंडलिंग, और प्रत्येक ड्राइवर के लिए न्यूनतम 50 से 100 किलोमीटर की ऑन-रोड प्रैक्टिस शामिल होगी। विक्रेता को ट्रेनर्स की फीस, यात्रा, आवास और ईंधन सहित सभी लागतें वहन करनी होंगी, जबकि लोकपाल को कोई अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ेगा।

विपक्ष और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रियाएं: इस कदम पर विपक्षी दलों ने तीखी नाराजगी जताई है। जनहित वकील प्रशांत भूषण ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि लोकपाल को कई वर्षों तक रिक्त रखकर और फिर आज्ञाकारी सदस्यों की नियुक्ति करके कमजोर किया गया है, जो भ्रष्टाचार से परेशान नहीं हैं और अपनी लग्जरी पर ध्यान देते हैं। उन्होंने 70 लाख रुपये की बीएमडब्ल्यू कारों की खरीद को इसका उदाहरण बताया। कांग्रेस प्रवक्ता शामा मोहम्मद ने इसे आरएसएस समर्थित इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन से जोड़ते हुए कहा कि यह कांग्रेस सरकार को हटाने का माध्यम था, लेकिन अब भ्रष्टाचार विरोधी संस्थान 5 करोड़ की लग्जरी कारें खरीद रहा है।

कांग्रेस नेता सरल पटेल ने लोकपाल के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या पिछले 11 वर्षों में इसने एक भी मामले पर कार्रवाई की है। तेलंगाना कांग्रेस नेता समा राम मोहन रेड्डी ने भी एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार के 11 वर्षों में लोकपाल ने एक भी भ्रष्टाचार मामले को हल नहीं किया, फिर भी 5 करोड़ की लग्जरी कारें खरीद रहा है। टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने इसे ‘भयानक ऑप्टिक्स’ बताया, जो जांच के बजाय फिजूलखर्ची पर जोर देता है। कांग्रेस केरल इकाई ने अन्ना हजारे और उनके साथियों पर राष्ट्र को गुमराह करने का आरोप लगाया और लोकपाल की भ्रष्टाचार पर चुप्पी की निंदा की।

यह घटना लोकपाल की स्वतंत्रता, प्रभावशीलता और भ्रष्टाचार विरोधी भूमिका पर सवाल उठाती है। आलोचक इसे संस्थान की विफलता का प्रतीक मानते हैं, जबकि लोकपाल ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बहस होने की संभावना है।

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