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by-Ravindra Sikarwar

पद एवं ऐतिहासिक उपलब्धि:

  • जापान की संसद ने मंगलवार, 21 अक्टूबर 2025 को 64 वर्षीय सना ए ताकाइची को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में चुन लिया।
  • वे साथ ही शासक पार्टी Liberal Democratic Party (एलडीपी) की पहली महिला अध्यक्ष भी बनी हैं।
  • इस नियुक्ति ने जापान के पुरुष-प्रभुत्व वाले राजनीतिक परिदृश्य में एक नए युग का संकेत दिया है।

पृष्ठभूमि एवं राजनीति में पदार्पण:

  • ताका इची का जन्म नारः (नारा) प्रान्त, जापान में हुआ था।
  • उन्होंने कोबे विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
  • 1993 में वे स्वतंत्र रूप से जापानी प्रतिनिधि सभा सदस्य बनीं, बाद में 1996 में एलडीपी में शामिल हुईं।
  • उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Shinzo Abe के नेतृत्व में विभिन्न मंत्री पदों पर काम किया, जिनमे आंतरिक मामलों व संचार, आर्थिक सुरक्षा जैसे विभाग शामिल रहे।

प्रधानमंत्री तक का मार्ग:

  • 4 अक्टूबर 2025 को उन्होंने एलडीपी की अध्यक्षता जीती, जिसके बाद उन्हें प्रधानमंत्री बनने की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त मिली।
  • संसद के निचले सदन में उन्होंने 237 में से पर्याप्त वोट हासिल किए।
  • उनकी सरकार के गठन के लिए एलडीपी ने नए गठबंधन की रणनीति अपनाई, क्योंकि पारंपरिक साझेदार पार्टी पीछे हट गई थी।

नीतियाँ और विचारधारा:

  • ताका इची की विचारधारा बहुत रूढ़िवादी और राष्ट्रीय-सेतु (hawkish) मानी जाती है।
  • उन्होंने जापान-अमेरिका रक्षा गठबंधन को महत्वपूर्ण बताया तथा रक्षा बजट बढ़ाने की बात कही है।
  • आर्थिक मोर्चे पर उन्होंने सुस्त वृद्धि एवं महंगाई को मुख्य चुनौती माना है।
  • सामाजिक एवं लैंगिक मुद्दों पर उनकी स्थिति विवादास्पद रही है — उन्होंने महिलाओं के प्रति विशेष नीति-उत्साह नहीं दिखाया है और सिर्फ दो महिला मंत्री नियुक्त किए हैं।

चुनौतियाँ और आगे की राह:

  • उनकी सरकार को संसद में पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, जिससे स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
  • आर्थिक रूप से, जापान की भारी ऋण-स्थिति एवं वैश्विक चुनौतियाँ बड़ी बाधा हैं।
  • विदेश नीति में चीन व दक्षिण कोरिया के साथ संबंधों पर निगाहें लगी हुई हैं, विशेष रूप से उनके इतिहास-सम्बंधी रुख के कारण।

निष्कर्ष:
सना ए ताकाइची की प्रधानमंत्री बनने की घटना न सिर्फ एक महिला के लिए बल्कि जापान की राजनीति के लिए भी मील का पत्थर है। हालांकि यह सफल पथ है, लेकिन आगे उन्हें कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा — चाहे वह आर्थिक हों, सामाजिक हों या राजनीतिक। उनका भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वे कितनी सफलता से अपने वादों को पूरा कर पाती हैं।