by-Ravindra Sikarwar
पश्चिम बंगाल के प्रमुख रेलवे जंक्शन बर्धमान स्टेशन पर रविवार शाम को एक बड़ी भगदड़ की घटना ने यात्रियों में दहशत फैला दी। त्योहारी सीजन के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ के बीच एक साथ तीन से चार ट्रेनों के पहुंचने से प्लेटफॉर्म 4, 5 और 6 पर अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में कम से कम 12 लोगों को चोटें आईं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। रेलवे प्रशासन ने घटना की तत्काल जांच शुरू कर दी है, जबकि स्थानीय अस्पतालों में घायलों का इलाज चल रहा है। यह घटना भारतीय रेलवे की भीड़ प्रबंधन व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है, खासकर तब जब दुर्गा पूजा और दीवाली जैसे त्योहारों के समय स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या चरम पर होती है।
घटना की पूरी कथा: कैसे बनी भगदड़ की स्थिति?
घटना रविवार शाम करीब 5:15 से 5:25 बजे के बीच घटी। बर्धमान स्टेशन, जो हावड़ा-दिल्ली मुख्य लाइन पर स्थित है, त्योहारी यात्रा के कारण पहले से ही हलचल भरा था। प्लेटफॉर्म 4 पर हावड़ा मेन लाइन लोकल ट्रेन, प्लेटफॉर्म 5 पर हल्दीबाड़ी एक्सप्रेस और अन्य प्लेटफॉर्मों पर एक साथ कई ट्रेनें पहुंचीं। यात्रियों ने उतरने और चढ़ने की होड़ मचाई, जिससे संकरी सीढ़ियों और फुट ओवर ब्रिज पर भारी दबाव पड़ा।
चश्मदीदों के अनुसार, फुट ओवर ब्रिज की सीढ़ियों पर बैठे या चलते यात्रियों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि जगह कम पड़ गई। एक महिला ने बताया कि वह प्लेटफॉर्म 5 से उतर रही थी, जब भीड़ के दबाव में संतुलन बिगड़ गया। महिला के गिरते ही आसपास के यात्री भी आपस में टकरा गए, जिससे कई लोग सीढ़ियों से लुढ़क पड़े। कुछ रिपोर्ट्स में इसे स्टाम्पेड जैसी स्थिति बताया गया, जहां लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्टेशन पर भीड़ का आलम दिखाई देता है, जहां यात्री ट्रेनों में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की कर रहे हैं।
रेलवे के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह पूर्ण रूप से भगदड़ नहीं थी, बल्कि एक महिला के संतुलन खोने से शुरू हुई श्रृंखला प्रतिक्रिया थी। लेकिन यात्रियों का कहना है कि स्टेशन पर पर्याप्त सुरक्षा कर्मी या भीड़ नियंत्रण उपाय नहीं थे। “ट्रेनें एक साथ रुकीं तो सब भागे, लेकिन ब्रिज पर जगह ही नहीं थी। लोग गिरने लगे तो चीख-पुकार मच गई,” एक घायल यात्री ने अस्पताल से बातचीत में कहा।
घायलों की स्थिति और त्वरित कार्रवाई:
हादसे में घायल हुए 12 यात्रियों में पांच महिलाएं और सात पुरुष शामिल हैं। चोटें ज्यादातर मामूली बताई जा रही हैं—जैसे चोटें, मोच, खरोंच और हल्का सदमा। सभी को तुरंत बर्धमान मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां रेलवे डॉक्टरों की एक टीम ने प्राथमिक उपचार दिया। अस्पताल के चिकित्सक डा. सुनील कुमार ने बताया कि अधिकांश घायलों को डिस्चार्ज कर दिया गया है, और बाकी की हालत स्थिर है। कोई गंभीर मामला या मौत की खबर नहीं है।
रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और स्टेशन स्टाफ ने फौरन मौके पर पहुंचकर घायलों को सुरक्षित निकाला। ट्रेन सेवाएं कुछ देर के लिए बाधित रहीं, लेकिन जल्द ही सामान्य हो गईं। स्थानीय पुलिस ने भी अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया और स्टेशन परिसर को सुरक्षित किया।
त्योहारी भीड़ और स्टेशन की कमियां:
यह घटना त्योहारी सीजन की व्यस्तता को दर्शाती है, जब बर्धमान जैसे स्टेशनों पर प्रतिदिन हजारों यात्री गुजरते हैं। हल्दीबाड़ी, सिलिगुड़ी और अन्य उत्तर बंगाल दिशाओं की ट्रेनों के लिए यह स्टेशन एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। लेकिन स्टेशन की एकमात्र फुट ओवर ब्रिज और संकरी सीढ़ियां पुरानी समस्या बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एक साथ कई ट्रेनों के शेड्यूल में बदलाव या अतिरिक्त प्लेटफॉर्म की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया।
पिछले वर्षों में भी रेलवे स्टेशनों पर ऐसी घटनाएं घटी हैं। 2025 के फरवरी में नई दिल्ली स्टेशन पर 18 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 2020 में संतरागाची स्टेशन पर दो की जान गई थी। ये हादसे हमेशा भीड़ प्रबंधन की कमी को उजागर करते हैं।
रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया: जांच और सुधार के वादे
दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा, “यह भगदड़ नहीं थी, बल्कि भीड़ के दबाव में एक दुर्घटना थी। हम घायलों को हर संभव सहायता दे रहे हैं।” रेलवे ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है, जो स्टेशन की सुरक्षा प्रोटोकॉल, ट्रेन शेड्यूलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों की पड़ताल करेगी। प्रारंभिक रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि फुट ओवर ब्रिज को चौड़ा किया जाए, एस्केलेटर लगाए जाएं और सीसीटीवी कवरेज बढ़ाया जाए।
स्थानीय विधायक और राजनीतिक नेताओं ने भी अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने रेलवे अधिकारियों से तत्काल सुधार की मांग की और कहा कि त्योहारी सीजन में अतिरिक्त स्टाफ तैनाती जरूरी है। पश्चिम बंगाल सरकार ने भी इस घटना पर नजर रखने का भरोसा दिलाया है।
भविष्य के लिए सबक: सुरक्षा पहले
यह हादसा भारतीय रेलवे के लिए एक चेतावनी है। त्योहारों के दौरान यात्री संख्या में 50% तक वृद्धि होती है, लेकिन स्टेशनों की क्षमता अपर्याप्त बनी रहती है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि डायनामिक साइनेज, भीड़ सेंसर और नियमित ड्रिल जैसे उपाय अपनाए जाएं। यात्रियों से अपील है कि वे घबराएं नहीं और आरपीएफ के निर्देशों का पालन करें।
रेलवे ने वादा किया है कि आने वाले दिनों में बर्धमान स्टेशन पर सुधार कार्य तेज होंगे। यह घटना हमें याद दिलाती है कि यात्रा की खुशी को दर्द में बदलने से बचने के लिए पूर्वानुमान और तैयारी कितनी महत्वपूर्ण है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए, उम्मीद है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
