by-Ravindra Sikarwar
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। करवा चौथ के पर्व से ठीक पहले, 28 वर्षीय एक महिला ने अपने पति द्वारा साड़ी उपहार में न देने के कारण कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि सामाजिक दबावों, वैवाहिक अपेक्षाओं और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करती है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पति को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। इस दुखद घटना ने करवा चौथ जैसे त्योहारों पर बढ़ते सामाजिक दबाव और उनके प्रभावों पर सवाल उठाए हैं। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
यह दुखद घटना मथुरा के गोविंद नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत राधा विहार कॉलोनी में 10 अक्टूबर 2025 की रात को घटी। मृतका, राधिका शर्मा (28 वर्ष), अपने पति अजय शर्मा (32 वर्ष) और तीन साल की बेटी के साथ रहती थीं। राधिका ने करवा चौथ के लिए अपने पति से एक नई साड़ी उपहार में मांगी थी, जो इस त्योहार पर पति-पत्नी के बीच प्रेम और परंपरा का प्रतीक मानी जाती है। प्रत्यक्षदर्शियों और पड़ोसियों के अनुसार, राधिका ने कई दिनों से अजय से नई साड़ी लाने की बात कही थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण अजय ने इसे टाल दिया।
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, 10 अक्टूबर की शाम को राधिका और अजय के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई। अजय ने कथित तौर पर कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति साड़ी खरीदने की इजाजत नहीं देती और राधिका को अपनी पुरानी साड़ियों से काम चलाना चाहिए। इस बात से नाराज और आहत राधिका ने रात करीब 9 बजे अपने कमरे में जाकर फांसी लगा ली। उनकी बेटी उस समय पड़ोस में खेल रही थी, और अजय घर पर मौजूद नहीं थे। पड़ोसियों ने दरवाजा खटखटाने की कोशिश की, लेकिन जवाब न मिलने पर दरवाजा तोड़ा गया। तब तक राधिका की मौत हो चुकी थी।
पड़ोसी रीता देवी ने बताया, “राधिका बहुत सीधी और शांत स्वभाव की थी। उसने कुछ दिन पहले मुझसे कहा था कि वह करवा चौथ के लिए साड़ी चाहती है, लेकिन अजय ने पैसे की कमी का हवाला दिया। मुझे नहीं पता था कि यह बात इतनी गंभीर हो जाएगी।” राधिका की सास, जो उसी घर में रहती हैं, ने कहा कि बहस के बाद राधिका ने कुछ नहीं खाया और चुपचाप अपने कमरे में चली गई थी।
घटना की सूचना मिलते ही गोविंद नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने राधिका का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया। अजय को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। थाना प्रभारी विनोद मिश्रा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि दंपती के बीच अक्सर छोटी-मोटी बातों पर बहस होती थी, लेकिन यह पहली बार था जब बात इतनी बढ़ गई।
पुलिस ने राधिका के मोबाइल फोन और घर से कुछ नोट्स बरामद किए हैं, जिनमें से एक में लिखा था, “मुझे बस थोड़ा सा प्यार चाहिए था।” यह नोट जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या राधिका पर कोई अन्य दबाव था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या अजय ने राधिका के साथ मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न किया था, जो आत्महत्या का कारण बना हो।
करवा चौथ, जो पति की लंबी उम्र के लिए पत्नियों द्वारा रखा जाने वाला एक पारंपरिक व्रत है, उत्तर भारत में विशेष रूप से लोकप्रिय है। इस त्योहार पर महिलाएं सज-संवर कर नई साड़ियां, गहने और उपहारों की अपेक्षा करती हैं। हालांकि यह प्रथा प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, लेकिन कई बार सामाजिक दबाव और तुलना के कारण यह तनाव का कारण बन जाता है। मनोवैज्ञानिक डॉ. शालिनी वर्मा ने बताया, “आज के समय में सोशल मीडिया और सामाजिक अपेक्षाएं महिलाओं पर अनावश्यक दबाव डालती हैं। अगर पति उपहार नहीं दे पाता, तो यह पत्नी के लिए अपमान या कमतर महसूस करने का कारण बन सकता है।”
राधिका के मामले में, पड़ोसियों ने बताया कि वह सोशल मीडिया पर सक्रिय थी और अक्सर करवा चौथ से संबंधित पोस्ट देखती थी, जिसमें अन्य महिलाएं अपने पतियों से मिले उपहार दिखा रही थीं। यह संभव है कि सामाजिक तुलना और अपेक्षाओं ने उसकी मानसिक स्थिति को प्रभावित किया हो। मथुरा के सामाजिक कार्यकर्ता रेखा चौधरी ने कहा, “यह सिर्फ साड़ी की बात नहीं है। यह समाज में बनाए गए उन दबावों की कहानी है, जो महिलाओं को परफेक्ट पत्नी बनने के लिए मजबूर करते हैं। हमें मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा।”
राधिका की मौत से उनका परिवार और पड़ोसी गहरे सदमे में हैं। उनकी बेटी, जो अभी मासूम है, को उसकी दादी की देखरेख में रखा गया है। राधिका के मायके वालों ने अजय पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, अजय के परिवार का कहना है कि वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और उसने राधिका को समझाने की कोशिश की थी। अजय ने पुलिस को बताया, “मैं उससे बहुत प्यार करता था। मेरी गलती थी कि मैं उसे खुश नहीं रख सका।”
स्थानीय समुदाय में इस घटना ने गहरी बहस छेड़ दी है। कुछ लोग इसे सामाजिक दबाव का नतीजा मान रहे हैं, तो कुछ इसे वैवाहिक रिश्तों में संवाद की कमी से जोड़ रहे हैं। मथुरा के एक स्थानीय एनजीओ, ‘नारी शक्ति संगठन’, ने राधिका के परिवार को कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता देने की पेशकश की है। संगठन की अध्यक्ष अनीता यादव ने कहा, “हमें समाज में यह संदेश देना होगा कि प्यार और सम्मान उपहारों से नहीं मापा जाता। महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास से भरा बनाना होगा।”
यह दुखद घटना हमें कई सबक देती है। समाज और परिवारों को मानसिक स्वास्थ्य, संवाद और अपेक्षाओं के प्रबंधन पर ध्यान देना होगा। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
- मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग सेंटर स्थापित किए जाएं। हेल्पलाइन नंबर जैसे 14416 को प्रचारित किया जाए।
- सामाजिक दबाव कम करें: त्योहारों पर उपहारों की अनावश्यक अपेक्षाओं को कम करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
- वैवाहिक संवाद: दंपतियों को एक-दूसरे की भावनाओं को समझने और खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- आर्थिक सहायता: आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में मदद की जाए।
राधिका की यह त्रासदी न केवल एक परिवार का नुकसान है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है। करवा चौथ जैसे त्योहार प्रेम और एकता का प्रतीक होने चाहिए, न कि दबाव और तनाव का कारण। पुलिस ने मामले की गहन जांच का वादा किया है, और उम्मीद है कि राधिका के परिवार को न्याय मिलेगा। यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्यार और सम्मान छोटी-छोटी चीजों में छिपा होता है, न कि भौतिक उपहारों में।
