Spread the love

by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: भारत सरकार ने आज से जीएसटी 2.0 को लागू कर दिया है, जिसमें रसोई के आवश्यक सामान, दवाइयों, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसी 375 वस्तुओं पर कर दरों में उल्लेखनीय कमी की गई है। इस कदम का उद्देश्य नवरात्रि के त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ को कम करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “दोहरी खुशी” करार देते हुए कहा कि यह कदम मध्यम वर्ग और गरीबों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगा। हालांकि, पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्यों ने इस कटौती से ₹20,000 करोड़ के राजस्व नुकसान की आशंका जताई है।

जीएसटी 2.0 की मुख्य विशेषताएं:
जीएसटी 2.0 के तहत, कई रोजमर्रा की वस्तुओं पर कर दरों को 18% और 28% के स्लैब से घटाकर 12% और 5% के निचले स्लैब में लाया गया है।

  • रसोई का सामान: दाल, चावल, तेल और मसाले अब 5% के कर स्लैब में आएंगे, जो पहले 12% या उससे अधिक पर थे।
  • दवाइयां: जीवन रक्षक दवाओं पर जीएसटी को पूरी तरह से हटा दिया गया है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स: मोबाइल फोन, टीवी और रेफ्रिजरेटर पर कर 28% से घटाकर 18% किया गया।
  • ऑटोमोबाइल: इलेक्ट्रिक वाहनों और छोटी कारों पर जीएसटी 12% से घटकर 5% हो गया।

ये बदलाव उपभोक्ताओं को सस्ते उत्पाद और सेवाएं प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, खासकर त्योहारी मौसम में जब खरीदारी की मांग बढ़ जाती है।

सरकार और उद्योग की प्रतिक्रिया:
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, “जीएसटी 2.0 न केवल उपभोक्ताओं को राहत देगा, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था को और गतिशील बनाएगा। यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक और कदम है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह कटौती नवरात्रि और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस कदम से उपभोक्ता खर्च में वृद्धि होगी, जिससे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

उद्योग जगत ने भी इस कदम का स्वागत किया है। ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने कहा कि कम कर दरें बिक्री को बढ़ावा देंगी, खासकर त्योहारी सीजन में। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में व्यापारियों ने बताया कि ग्राहकों ने सस्ते उत्पादों की उम्मीद में खरीदारी शुरू कर दी है।

राज्यों की चिंताएं:
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चेतावनी दी है कि जीएसटी दरों में कटौती से राज्यों को भारी राजस्व नुकसान होगा। उनके अनुमान के अनुसार, पश्चिम बंगाल को अकेले ₹20,000 करोड़ का नुकसान हो सकता है, जिसका असर विकास परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर पड़ सकता है। अन्य विपक्षी शासित राज्यों जैसे केरल और तमिलनाडु ने भी केंद्र सरकार से राजस्व क्षतिपूर्ति की मांग की है। जीएसटी परिषद की हालिया बैठक में इन मुद्दों पर गहन चर्चा हुई, लेकिन केंद्र ने आश्वासन दिया कि राज्यों के नुकसान की भरपाई के लिए वैकल्पिक उपाय किए जाएंगे।

आर्थिक प्रभाव और भविष्य:
जीएसटी 2.0 की शुरुआत 2017 में लागू हुए मूल जीएसटी ढांचे में एक बड़ा सुधार है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उपभोक्ता मांग को बढ़ाने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद करेगा, जो हाल के महीनों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला समस्याओं के कारण बढ़ी थी। हालांकि, कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि सरकार को राजस्व संतुलन बनाए रखने के लिए सावधानी बरतनी होगी।

सरकार ने यह भी घोषणा की है कि जीएसटी 2.0 के तहत कर प्रक्रियाओं को और सरल किया जाएगा, जिससे छोटे व्यवसायों को भी लाभ होगा। यह कदम भारत की अर्थव्यवस्था को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *