by-Ravindra Sikarwar
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के साथ शुल्क विवाद के बीच वैश्विक राजनीति में पूर्वानुमेयता (predictability) के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आज के अनिश्चित वैश्विक माहौल में, देशों के बीच संबंधों में स्थिरता और स्पष्टता का होना बहुत ज़रूरी है।
शुल्क विवाद और भारत का रुख:
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार शुल्क को लेकर कुछ मतभेद चल रहे हैं। हाल के दिनों में, अमेरिका ने कुछ भारतीय उत्पादों पर शुल्क लगाए हैं, और भारत ने भी जवाबी कार्रवाई की है। इस संदर्भ में, जयशंकर ने संकेत दिया कि व्यापारिक नियमों में अचानक बदलाव या अप्रत्याशित नीतियां देशों के बीच विश्वास को कमजोर करती हैं।
पूर्वानुमेयता का महत्व:
जयशंकर ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक संबंधों को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूर्वानुमेयता (predictability) एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। इसका अर्थ है कि देशों को अपनी नीतियों और निर्णयों में स्थिरता बनाए रखनी चाहिए ताकि अन्य देश उनके साथ सहयोग करने के लिए एक विश्वसनीय आधार पर भरोसा कर सकें। उन्होंने कहा कि जब नियम बार-बार बदलते हैं, तो इससे अनिश्चितता बढ़ती है, जिससे व्यापार, निवेश और कूटनीति पर नकारात्मक असर पड़ता है।
वैश्विक अनिश्चितता और बहुध्रुवीय दुनिया:
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि दुनिया एक बहुध्रुवीय (multipolar) व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां सत्ता कुछ ही देशों के हाथ में केंद्रित नहीं है। इस बदलाव के दौर में, देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। जयशंकर का बयान यह दर्शाता है कि भारत एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था चाहता है जो नियमों पर आधारित हो, जहां सभी देशों के लिए समान अवसर और स्थिर नीतियां हों।
यह बयान अमेरिका के साथ भारत के संबंधों की जटिलता को भी उजागर करता है। जहां दोनों देश रणनीतिक और रक्षा सहयोग में भागीदार हैं, वहीं व्यापार जैसे कुछ क्षेत्रों में मतभेद भी हैं। जयशंकर का संदेश यह है कि दोनों देशों को इन मुद्दों को बातचीत और पूर्वानुमानित नीतियों के माध्यम से हल करना चाहिए।
