by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली/विशाखापत्तनम: भारत ने 11वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बड़े उत्साह और भव्यता के साथ मनाया। योग के वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक विशाल कार्यक्रम का नेतृत्व किया, जहाँ अनुमानित 3 लाख प्रतिभागियों ने योग अभ्यास में भाग लिया। यह आयोजन योग के प्रति देश की प्रतिबद्धता और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने के प्रयासों को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने का एक माध्यम है। उन्होंने योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और इसके लाभों को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया। विशाखापत्तनम में आयोजित इस मुख्य कार्यक्रम में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसमें पेशेवर योग प्रशिक्षकों ने विभिन्न योगासनों और प्राणायाम का प्रदर्शन किया।
देश भर में भी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, पार्कों, स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक केंद्रों में योग सत्रों का आयोजन किया गया।
भारतीय सशस्त्र बलों ने भी इस दिन को विशेष रूप से मनाया। सेना के जवानों ने उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद योग अभ्यास किया, जो उनकी शारीरिक और मानसिक दृढ़ता का प्रतीक है। नौसेना के जवानों ने भी युद्धपोतों पर योग सत्र आयोजित किए, जिससे समुद्र के बीच भी योग के संदेश का प्रसार हुआ। इन आयोजनों ने दर्शाया कि योग कैसे किसी भी परिस्थिति में शांति और शक्ति का स्रोत बन सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2014 में भारत के प्रस्ताव पर मान्यता दी थी, अब एक वैश्विक आंदोलन बन गया है। यह दिन न केवल योग के शारीरिक लाभों को उजागर करता है, बल्कि मानसिक शांति, तनाव मुक्ति और समग्र कल्याण के लिए इसके महत्व को भी रेखांकित करता है। भारत द्वारा इस दिवस का भव्य आयोजन, योग को विश्व कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में स्थापित करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
