
इस्लामाबाद/नई दिल्ली: भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। लश्कर-ए-तैयबा का एक कुख्यात आतंकवादी, सैफुल्लाह, जिसे कई अन्य नामों – विनोद कुमार, मोहम्मद सलीम, खालिद, वनियाल, वाजिद और सलीम भाई – से भी जाना जाता था, पाकिस्तान में मारा गया है। यह आतंकी नेपाल में लश्कर-ए-तैयबा के पूरे नेटवर्क का संचालन करता था और उसका मुख्य कार्य संगठन की आतंकवादी गतिविधियों के लिए आतंकियों की भर्ती और वित्तीय सहायता जुटाना था। सैफुल्लाह का नाम विशेष रूप से 2006 में नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय पर हुए भयावह आतंकी हमले की साजिश रचने में प्रमुखता से सामने आया था।
विश्वसनीय खुफिया सूत्रों के अनुसार, सैफुल्लाह को रविवार (18 मई 2025) को पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बदीन जिले के माटली तालुका में मार गिराया गया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उसे किसने मारा। यह आतंकी सरगना नेपाल के रास्ते लश्कर के प्रशिक्षित आतंकवादियों को अवैध रूप से भारतीय सीमा में दाखिल कराने में भी सक्रिय रूप से लिप्त था। सैफुल्लाह लश्कर के एक शीर्ष कमांडर, आजम चीमा उर्फ बाबाजी का एक करीबी सहयोगी माना जाता था, जो संगठन की आतंकी गतिविधियों की योजना और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
नेपाल में अपनी पहचान छुपाने के लिए सैफुल्लाह ‘विनाश कुमार’ के छद्म नाम का इस्तेमाल करता था। उसने नगमा बानू नामक एक नेपाली महिला से शादी भी की थी, जिसका इस्तेमाल वह अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए कर रहा था। भारतीय जांच एजेंसियों के पास मौजूद ठोस सबूतों के अनुसार, सैफुल्लाह ने न केवल 2006 में नागपुर में RSS मुख्यालय पर हुए हमले की साजिश रची थी, बल्कि 2001 में रामपुर स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हुए घातक आतंकी हमले और 2005 में बेंगलुरु के प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) पर हुए आतंकी हमले की साजिश में भी उसकी गहरी संलिप्तता पाई गई थी। हाल के दिनों में, वह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के माटली इलाके से अपनी आतंकी गतिविधियों का संचालन कर रहा था और लगातार लश्कर-ए-तैयबा के लिए नए और कट्टरपंथी युवाओं की भर्ती कर रहा था।
पहलगाम में हुए हालिया बर्बर आतंकी हमले के बाद, भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था, जिसके तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्थित लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय सहित कम से कम नौ बड़े आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया गया था। इसके बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के भीतर कुछ महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया था। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान के भीतर ही लश्कर के इस उच्च पदस्थ और कुख्यात कमांडर का मारा जाना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक जीत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही स्पष्ट रूप से कहा है कि भारत के दुश्मनों को चाहे वे कहीं भी छिपे हों, बख्शा नहीं जाएगा। यह उल्लेखनीय है कि पिछले चार वर्षों में पाकिस्तान के भीतर कई ऐसे खूंखार आतंकी मारे गए हैं, जो भारत में बड़े पैमाने पर आतंकी हमलों की साजिश रचने और उन्हें अंजाम देने में शामिल थे। सैफुल्लाह का सफाया इसी कड़ी में एक और महत्वपूर्ण अध्याय है, जो सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
