रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
MP SI Exam : मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा आयोजित की जाने वाली सब इंस्पेक्टर (SI) और सूबेदार भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। परीक्षा से ठीक पहले आधिकारिक वेबसाइट के ठप रहने से परेशान रहे छात्रों के सामने अब परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की नई चुनौती खड़ी हो गई है। त्योहारी सीजन और शादियों के इस दौर में ट्रेनों और बसों में कंफर्म टिकट न मिलने के कारण दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक जाना अभ्यर्थियों के लिए सिरदर्द बन गया है।
त्योहारी सीजन में सफर की भारी किल्लत, महंगे किराए से छात्र परेशान
MP SI Exam मध्य प्रदेश में 30 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक अलग-अलग शहरों में 507 पदों के लिए एमपीसीआई परीक्षा का आयोजन किया जाना है। ठीक इसी समय नवरात्रि के बाद दिवाली और भाई दूज जैसे बड़े त्योहारों का पीक सीजन चल रहा है। इस वजह से सार्वजनिक परिवहन के सभी साधनों में भारी भीड़ उमड़ रही है। स्थिति यह है कि ज्यादातर ट्रेनों और बसों में रिजर्वेशन फुल हो चुके हैं, और जहां टिकट मिल भी रहे हैं वहां मनमाना किराया वसूला जा रहा है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले छात्र इतने महंगे सफर का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।
वेबसाइट ठप होने के बाद अब एग्जाम डेट आगे बढ़ाने की उठी मांग
MP SI Exam इससे पहले ESB की वेबसाइट लंबे समय तक मेंटेनेंस और तकनीकी खराबी के चलते बंद रही थी, जिससे करीब डेढ़ लाख छात्र अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड नहीं कर पा रहे थे। हालांकि बाद में वेबसाइट सुचारू हुई, लेकिन ऐन वक्त पर परीक्षा शेड्यूल होने से ट्रैवलिंग की पुख्ता व्यवस्था नहीं हो पाई। इस गंभीर समस्या को देखते हुए जनप्रतिनिधियों और छात्रों ने आवाज उठाई है। मनावर के विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने भी सरकार से आग्रह किया है कि त्योहारी माहौल और यात्रा की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए इस परीक्षा को दिवाली के बाद आयोजित किया जाना चाहिए ताकि युवाओं को राहत मिल सके।
परीक्षा देने को तैयार हैं युवा, लेकिन केंद्र तक पहुंचने का साधन नहीं
MP SI Exam परीक्षा में शामिल होने वाले कई अभ्यर्थियों का कहना है कि वे परीक्षा देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन उनके गृह जिलों से परीक्षा केंद्र सैकड़ों किलोमीटर दूर दिए गए हैं। त्योहारों के इस माहौल में परिवहन के साधन उपलब्ध न होने के कारण वे तनाव में हैं। छात्रों का कहना है कि बोर्ड को परीक्षा की तिथियां तय करते समय व्यावहारिक दिक्कतों और त्योहारों के सीजन का विशेष ध्यान रखना चाहिए था, ताकि मेहनतकश युवाओं को इस तरह की भारी असुविधा का सामना न करना पड़े।

