Delhi October Minimum Temperature:राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। जहाँ एक तरफ ठंड ने अपनी आमद दर्ज करा दी है, वहीं दूसरी तरफ प्रदूषण और यमुना नदी की स्थिति ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शहर में कई तरह के पर्यावरणीय बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट
Delhi October Minimum Temperature:मंगलवार को दिल्ली में इस अक्टूबर महीने का सबसे कम न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया, जो पिछले तीन सालों में सबसे कम है।
- सफदरजंग: यहाँ न्यूनतम तापमान 15.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.9 डिग्री कम है।
- अयानगर: सबसे कम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 2 डिग्री कम) दर्ज किया गया।
- अन्य इलाके: पालम में 15.5 डिग्री सेल्सियस, लोधी रोड में 15.6 डिग्री सेल्सियस और रिज क्षेत्र में 16.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।
- तुलना: इससे पहले 27 अक्टूबर 2023 को दिल्ली में न्यूनतम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
वायु गुणवत्ता (AQI) की स्थिति: सुधार के बावजूद कई इलाके ‘खराब’ श्रेणी में
Delhi October Minimum Temperature:केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार सुबह 8 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 168 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी सोमवार को यह 164 था।
हालाँकि औसत स्तर मध्यम है, लेकिन शहर के कई हिस्सों में हवा की स्थिति अभी भी खराब बनी हुई है:
- खराब श्रेणी वाले क्षेत्र: जहाँगीरपुरी (251), रोहिणी (237), आर.के. पुरम (234), द्वारका सेक्टर-8 (223), बवाना (216), आईआईटी दिल्ली (214), पंजाबी बाग (200) और आईजीआई एयरपोर्ट (211) जैसे इलाकों में AQI 200 के पार यानी ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया।
- मध्यम श्रेणी वाले क्षेत्र: आनंद विहार (175), चांदनी चौक (198), अलीपुर (197), पटपड़गंज (195), जेएनयू (146) और नरेला (129) में हवा मध्यम स्थिति में रही। नोएडा (143) और ग्रेटर नोएडा (156) का हाल भी इसी श्रेणी में रहा।
- प्रशासनिक कदम: धूल प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए शहर की सड़कों पर एंटी-स्मॉग गन से लगातार पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
यमुना नदी में फिर लौटा जहरीला झाग
Delhi October Minimum Temperature:दिल्ली-एनसीआर के लोगों को एक साथ दोहरी पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कालिंदी कुंज के पास यमुना नदी की सतह पर एक बार फिर जहरीले सफेद झाग की मोटी परतें तैरती हुई नजर आई हैं। यह स्थिति तब सामने आई है जब हाल ही में नदी को पुनर्जीवित करने के लिए लगभग 9,000 करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की शुरुआत की गई थी, लेकिन ज़मीनी स्तर पर प्रदूषण की यह समस्या अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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